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अ॒भि द्रोणा॑नि ब॒भ्रव॑: शु॒क्रा ऋ॒तस्य॒ धार॑या । वाजं॒ गोम॑न्तमक्षरन् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
abhi droṇāni babhravaḥ śukrā ṛtasya dhārayā | vājaṁ gomantam akṣaran ||
Pad Path
अ॒भि । द्रोणा॑नि । ब॒भ्रवः॑ । शु॒क्राः । ऋ॒तस्य॑ । धार॑या । वाज॑म् । गोऽम॑न्तम् । अ॒क्ष॒र॒न् ॥ ९.३३.२
Rigveda » Mandal:9» Sukta:33» Mantra:2
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:23» Mantra:2
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:2
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (बभ्रवः) ज्ञान कर्म उपासना को धारण करनेवाले (शुक्राः) पवित्र अन्तःकरणवाले विद्वान् (ऋतस्य धारया) सच्चाई की धारा से (अभि द्रोणानि) सत्पात्रों के प्रति उपदेश देकर (वाजम् गोमन्तम्) उनके अनेक प्रकार के ऐश्वर्य को (अक्षरन्) बढ़ाते हैं ॥२॥
Connotation: - जो लोग वेदविद्या का सदुपदेश देते हैं, उनके सदुपदेश से सब प्रकार के अन्नादिक ऐश्वर्य बढ़ते हैं ॥२॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
गोमान् वाज
Word-Meaning: - [१] (बभ्रवः) = हमारा धारण करनेवाले, (शुक्राः) = ज्ञान की दीप्ति को बढ़ानेवाले ये वीर्यकण (ऋतस्य धारया) = ऋत के धारण के साथ - 'जो भी ठीक है' उसे प्राप्त कराते हुए (द्रोणानि अभि) = शरीर रूप पात्रों में प्राप्त होते हैं। शरीर में सुरक्षित होने पर ये सोमकण [क] हमारा धारण करते हैं, [ख] ज्ञानदीप्ति का वर्धन करते हैं, [ग] जो चीज ठीक है' उसे हमारे में सुरक्षित करते हैं। [२] ये सोमकण (गोमन्तम्) = प्रशस्त ज्ञान की वाणियोंवाले (वाजम्) = बल को (अक्षरन्) = हमारे में क्षरित करते हैं। 'गोमन्तं' शब्द का अर्थ 'प्रशस्त इन्द्रियोंवाले' भी किया जा सकता है। सोम हमारी इन्द्रियों को शक्तिशाली बनाता है, हमें बल को प्राप्त कराते हैं तथा हमारे ज्ञान को बढ़ाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- शरीर में धारित सोम [क] हमारा धारण करते हैं, [ख] हमारी दीप्ति को बढ़ाते हैं, [ग] हमें ठीक रखते हैं, [घ] बल का वर्धन करते हैं, [ङ] ज्ञान को प्राप्त कराते हैं।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (बभ्रवः) ज्ञानकर्मोपासनज्ञाः (शुक्राः) पवित्रान्तःकरणाः विद्वांसः (ऋतस्य धारया) सत्यस्य स्रोतसा (अभि द्रोणानि) सत्पात्राणि उपदिश्य (वाजम् गोमन्तम्) तेषामनेकधैश्वर्याणि (अक्षरन्) वर्द्धयन्ति ॥२॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Just as pure, powerful, brown nectar streams of soma shower milky energies to fill the casks of exhilarating drink for the aspirants, so do seasoned self- realised scholars and teachers of Vedic knowledge and experience, pure at heart and clairvoyant in vision and intelligence, let flow powerful exhilarating streams of knowledge and enlightenment in channels of truth, law and immortality for competent and conscientious seekers of life’s fulfilment.
