ए॒ष दे॒वो वि॒पा कृ॒तोऽति॒ ह्वरां॑सि धावति । पव॑मानो॒ अदा॑भ्यः ॥
English Transliteration
Mantra Audio
eṣa devo vipā kṛto ti hvarāṁsi dhāvati | pavamāno adābhyaḥ ||
Pad Path
ए॒षः । दे॒वः । वि॒पा । कृ॒तः । अति॑ । ह्वरां॑सि । धा॒व॒ति॒ । पव॑मानः । अदा॑भ्यः ॥ ९.३.२
Rigveda » Mandal:9» Sukta:3» Mantra:2
| Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:20» Mantra:2
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:2
Reads 379 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एष देवः) यह पूर्वोक्त देव (विपा) मेधावी विद्वानों ने (अति) विस्तार से (कृतः) वर्णन किया है “विप इति मेधाविनामसु पठितम्” नि० ३।१५। (अदाभ्यः) उपासना किया हुआ (पवमानः) यह पवित्र देव (ह्वरांसि) उपासकों के हृदय में (धावति) प्राप्त होता है ॥२॥
Connotation: - जिस परमात्मा का विद्वान् लोग वर्णन करते हैं, वह उपासना करने से उपासकों के हृदय में आविर्भाव को प्राप्त होता है ॥२॥
Reads 379 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
पवमान अदाभ्य
Word-Meaning: - [१] (विपा) = [विप् = A wise man] एक बुद्धिमान् पुरुष से (कृतः) = शरीर में परिष्कृत किया गया (एषः देवः) = यह रोगकृमियों को जीतनेवाला सोम [वीर्य] (ह्वरांसि अतिधावति) = सब कुटिलताओं को भी लांघ जाता है। शरीर में परिष्कृत सोम रोगों से व कुटिलताओं से बचाकर हमें स्वस्थ शरीर व निर्मल मनवाला बनाता है। [२] यह सोम (पवमानः) = हमें पवित्र करता है और (अदाभ्यः) = कभी हिंसित होने योग्य नहीं होता। जब सोम शरीर में सुरक्षित होता है तो मन में छलछिद्र व कुटिलता की भावनायें उत्पन्न नहीं होती। इसी प्रकार शरीर पर रोग आक्रमण नहीं कर पाते ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम रोगकृमियों को पराजित करता है और हमें कुटिल भावों से बचाता है ।
Reads 379 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एष, देवः) अयं पूर्ववर्णितः परमात्मा देवः (विपा) मेधाविभिर्विद्वद्भिः। विप इति मेधाविनामसु पठितम्। निघ० ३।१५ ॥ (अति) विस्तरेण (कृतः) वर्णितः (अदाभ्यः) उपासितः (पवमानः) पवित्रो देवः सः (ह्वरांसि) उपासकहृदये (धावति) प्राप्नोति ॥२॥
Reads 379 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - This refulgent spirit is celebrated by sages and, being undaunted, overtakes all crookedness, purifying and sanctifying everything and every mind.
