ए॒ष सूर्ये॑ण हासते॒ पव॑मानो॒ अधि॒ द्यवि॑ । प॒वित्रे॑ मत्स॒रो मद॑: ॥
English Transliteration
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eṣa sūryeṇa hāsate pavamāno adhi dyavi | pavitre matsaro madaḥ ||
Pad Path
ए॒षः । सूर्ये॑ण । हा॒स॒ते॒ । पव॑मानः । अधि॑ । द्यवि॑ । प॒वित्रे॑ । म॒त्स॒रः । मदः॑ ॥ ९.२७.५
Rigveda » Mandal:9» Sukta:27» Mantra:5
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:17» Mantra:5
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:5
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः) यह परमात्मा (सूर्येण हासते) सूर्य को भी अपने तेज से तिरस्कृत करता है (पवमानः) सबको पवित्र करनेवाला है (अधि द्यवि) और द्युलोकादि सम्पूर्ण लोकों में विराजमान है (पवित्रे मत्सरः मदः) पवित्र अन्तःकरणवाले पुरुषों को अपने आनन्द से आनन्दित करता है ॥५॥
Connotation: - परमात्मा की सत्ता से ही सूर्य-चन्द्रमा आदि प्रकाशित होते हैं और वही परमात्मा सब लोकान्तरों का अधिष्ठाता है; उसी में चित्तवृत्ति लगाने से पुरुष आनन्दित होता है, अन्यथा नहीं ॥५॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
सूर्य से स्पर्धा
Word-Meaning: - [१] (एषः) = यह सोम (सूर्येण) = सूर्य से (हासते) = स्पर्धा करता है [हासतिः स्पर्धाकर्माणि] । अर्थात् सुरक्षित हुआ हुआ सोम हमें सूर्य के समान तेजस्वी बनाता है। (पवमानः) = यह हमें पवित्र करता है। (अधि द्यवि) = मस्तिष्करूप द्युलोक में सूर्य के समान ज्ञान- ज्योतिवाला होता है। [२] (पवित्रे) = पवित्र हृदयवाले पुरुष में (मत्सरः) = आनन्द का संचार करनेवाला होता है और मदः-उल्लास का जनक होता है ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें सूर्य के समान दीप्तिवाला करता है ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः) अयं परमात्मा (सूर्येण हासते) सूर्यमपि स्वतेजसा परिभवति (पवमानः) सर्वं पवित्रयति (अधि द्यवि) द्युलोकादिसमस्तलोकेषु विराजते (पवित्रे मत्सरः मदः) विशुद्धान्तःकरणान्मनुष्यान् स्वानन्देनानन्दयति च ॥५॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - It rises and abides with the sun on top of the regions of light and, internalised in the pure mind and clairvoyant consciousness, it is the divine ecstasy of the celebrant.
