ए॒ष नृभि॒र्वि नी॑यते दि॒वो मू॒र्धा वृषा॑ सु॒तः । सोमो॒ वने॑षु विश्व॒वित् ॥
English Transliteration
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eṣa nṛbhir vi nīyate divo mūrdhā vṛṣā sutaḥ | somo vaneṣu viśvavit ||
Pad Path
ए॒षः । नृऽभिः॑ । वि । नी॒य॒ते॒ । दि॒वः । मू॒र्धा । वृषा॑ । सु॒तः । सोमः॑ । वने॑षु । वि॒श्व॒ऽवित् ॥ ९.२७.३
Rigveda » Mandal:9» Sukta:27» Mantra:3
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:17» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:3
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः) यह परमात्मा (वनेषु सोमः) प्रार्थनाओं में सौम्य स्वभाववाला है (दिवः मूर्धा) और द्युलोक का मूर्धारूप है (वृषा) सब कामनाओं को देनेवाला है (सुतः) स्वयंसिद्ध है (विश्ववित्) सर्वज्ञ है, एवंभूत परमात्मा (नृभिः विनीयते) मनुष्यों का उपास्य देव है ॥३॥
Connotation: - ईश्वर की आज्ञा को पालन करनेवाले नम्र पुरुषों के लिये परमात्मा सौम्यस्वभाव है और जो उद्दण्ड अनाज्ञाकारी हैं, उनके लिये परमात्मा उग्ररूप है। उक्त परमात्मा से सदैव अपने कल्याण की प्रार्थना करनी चाहिये ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
दिवः-मूर्धा-वृषा
Word-Meaning: - [१] (एषः) = यह सोम (नृभिः) = [कर्मनेतृभिः सा० ] यज्ञ आदि उत्तम कर्मों का प्रणयन करनेवालों से (विनीयते) = शरीर के अंग-प्रत्यंग में प्राप्त कराया जाता है । यह (दिवः मूर्धा) = ज्ञान का शिखर बनता है और (सुतः) = सम्यक् उत्पन्न हुआ हुआ (वृषा) = शक्ति का सेचन करनेवाला होता है । [२] यह (सोमः) = सोम [वीर्य] (वनेषु) = उपासकों में (विश्ववित्) = सब वसुओं को प्राप्त करानेवाला होता है [विद् लाभे] ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम ज्ञान के दृष्टिकोण से हमें शिखर पर पहुँचाता है और शक्तिशाली बनाता है।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः) अयं परमात्मा (वनेषु सोमः) प्रार्थनासु सौम्यः (दिवः मूर्धा) द्युलोकस्य मस्तकरूपः (वृषा) सर्वकामदः (सुतः) स्वयंसिद्धः (विश्ववित्) सर्वज्ञश्च एवम्भूतः परमात्मा (नृभिः विनीयते) मनुष्यैरुपास्यो भवति ॥३॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - This Soma, joyous spirit of divinity, is the summit of heaven, infinitely generous, self-existent and omniscient, and with meditation, the ecstasy of it is collected in abundance in the consciousness by the dedicated sages.
