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ए॒ष क॒विर॒भिष्टु॑तः प॒वित्रे॒ अधि॑ तोशते । पु॒ना॒नो घ्नन्नप॒ स्रिध॑: ॥

English Transliteration

eṣa kavir abhiṣṭutaḥ pavitre adhi tośate | punāno ghnann apa sridhaḥ ||

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Pad Path

ए॒षः । क॒विः । अ॒भिऽस्तु॑तः । प॒वित्रे॑ । अधि॑ । तो॒श॒ते॒ । पु॒ना॒नः । घ्नन् । अप॑ । स्रिधः॑ ॥ ९.२७.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:27» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:17» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब उक्त परमात्मा की नाना शक्तियों को वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (एषः) यह परमात्मा (कविः) सर्वज्ञ है (अभिष्टुतः) सबको स्तुति के योग्य है (पवित्रे अधि) अन्तःकरण के मध्य में (तोशते) प्राप्त होता है (स्रिधः) दुराचारी शत्रुओं को (अपघ्नन्) नाश करता हुआ (पुनानः) सत्कर्मियों को पवित्र करता है ॥१॥
Connotation: - परमात्मा दुष्टों का दमन करके सदाचारियों को उन्नतिशील बनाता है। उसके पाने के लिये अपने अन्तःकरण को पवित्र बनाना चाहिये। जो लोग अपने अन्तःकरण को पवित्र नहीं बनाते, वे उसको कदापि उपलब्ध नहीं कर सकते ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

कविः अभिष्टुतः

Word-Meaning: - [१] (एषः) = यह सोम (कविः) = क्रान्तप्रज्ञ होता है । सोम अपने रक्षक पुरुष को तीव्र बुद्धिवाला बनाता है। (अभिष्टुत:) = [ अभि स्तुतं येन] इस सोम के रक्षणवाला पुरुष प्रातः सायं प्रभु-स्तवन की वृत्तिवाला होता है। (पवित्रे) = पवित्र हृदयवाले पुरुष में यह (अधि तोशते) = आधि-व्याधिरूप शत्रुओं का हिंसन करनेवाला होता है । [२] (पुनानः) = यह हमारे जीवनों को पवित्र करता हुआ (स्त्रिधः) = सब कुत्सित वृत्तियों को (अपघ्नन्) = सुदूर विनष्ट करता है।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से [क] बुद्धि तीव्र होती है, [ख] प्रभु स्तवन की वृत्ति उत्पन्न होती है, [ग] वासनाओं का संहार होता है, [घ] पवित्रता होती है, [ङ] सब बुराइयों का विनाश होता है ।
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ARYAMUNI

अथोक्तपरमात्मनो विविधशक्तयो वर्ण्यन्ते।

Word-Meaning: - (एषः) अयं परमात्मा (कविः) सर्वज्ञः (अभिष्टुतः) सर्वैः स्तुत्यः (पवित्रे अधि) अन्तःकरणमध्ये (तोशते) प्राप्तो भवति (स्रिधः) दुराचारान् शत्रून् (अपघ्नन्) नाशयन् (पुनानः) सत्कर्मिणः पवित्रयति ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - This Soma, creative, inspiring and poetic spirit of universal joy, pure and sanctifying, manifests in the pure and pious consciousness of the devotees, eliminating disturbing negativities when it is contemplated with a concentrated mind.