तम॑ह्यन्भु॒रिजो॑र्धि॒या सं॒वसा॑नं वि॒वस्व॑तः । पतिं॑ वा॒चो अदा॑भ्यम् ॥
English Transliteration
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tam ahyan bhurijor dhiyā saṁvasānaṁ vivasvataḥ | patiṁ vāco adābhyam ||
Pad Path
तम् । अ॒ह्य॒न् । भु॒रिजोः॑ । धि॒या । स॒म्ऽवसा॑नम् । वि॒वस्व॑तः । पति॑म् । वा॒चः । अदा॑भ्यम् ॥ ९.२६.४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:26» Mantra:4
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:16» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:4
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (वाचः पतिम्) जो ऋग्वेदादि वाणियों का पति परमात्मा है और (अदाभ्यम्) जो निष्कपट सेवन करने योग्य है (संवसानम्) सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों में व्यापक है, (तम्) उस परमात्मा को तथा (विवस्वतः) उस प्रकाशस्वरूप की (भुरिजोः) शक्तियों को विद्वान् लोग (धिया) अपनी बुद्धि से (अह्यन्) साक्षात्कार करते हैं ॥४॥
Connotation: - जिस प्रकाशस्वरूप परमात्मा से ऋगादि चारों वेद उत्पन्न होते हैं अर्थात् ऋगादि वेद जिसकी वाणीरूप हैं, वह परमात्मा योगीजनों के ध्यानगोचर होकर उनको आनन्द का प्रदान करता है ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
वाचः पतिं - अदाभ्यम्
Word-Meaning: - [१] (विवस्वतः) = ज्ञान की किरणोंवाले ज्ञानी पुरुष के (संवसानम्) = निवास को उत्तम बनानेवाले (तं) = उस सोम को (धिया) = बुद्धिपूर्वक कर्मों को करने के द्वारा (भुरिजो:) = बाहुवों में (अह्यन्) = प्रेरित करते हैं । भुजाओं में व्याप्त होकर यह हमें शक्तिशाली बनाता है। इसको शरीर में सुरक्षित करने का उपाय यही है कि सदा हम कर्मों में लगे रहें । समझदारी के साथ कर्मों में लगे रहना वह साधन है जो कि हमें वासनाओं से बचाकर सोमरक्षण के योग्य बनाता है । [२] यह सोम (वाचः पतिम्) = वाणी का पति हैं, ज्ञान की वाणियों का स्वामी है। इसके रक्षण से हम ज्ञान की वाणियों को खूब समझने लगते हैं। (अदाभ्यम्) = यह सोम हिंसित नहीं होता, सोम के रक्षण के होने पर शरीर को रोगकृमि हिंसित नहीं कर पाते। एवं सोम हमारे लिये ज्ञानवर्धक व स्वास्थ्य को सिद्ध करनेवाला होता है।
Connotation: - भावार्थ- कर्मों में लगे रहने से सोम का रक्षण होता है। यह ज्ञान की वाणियों का पति तथा किन्हीं भी रोगों से पीड़ित न होने देनेवाला है।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (वाचः पतिम्) ऋग्वेदादिवाचां पतिम् (अदाभ्यम्) निष्कपटं सेवनीयम् (संवसानम्) व्यापकरूपेण सम्पूर्णब्रह्माण्डे वर्तमानं (तम्) तं परमात्मानं (विवस्वतः) तस्य प्रकाशस्वरूपस्य (भुरिजोः) शक्तीश्च विद्वांसः (धिया) स्वबुद्ध्या (अह्यन्) पश्यन्ति ॥४॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Hymns of the Veda, wise sages and infinite forms of existence, all with their light, motions, wisdom and vision celebrate and adore that Soma, lord of omniscience, peace and purity who shines radiant in the light of the sun between heaven and earth and who, fearless and indomitable, holds, protects, promotes and speaks through the voice of eternity.
