आ प॑वमान नो भरा॒र्यो अदा॑शुषो॒ गय॑म् । कृ॒धि प्र॒जाव॑ती॒रिष॑: ॥
English Transliteration
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ā pavamāna no bharāryo adāśuṣo gayam | kṛdhi prajāvatīr iṣaḥ ||
Pad Path
आ । प॒व॒मा॒न॒ । नः॒ । भ॒र॒ । अ॒र्यः । अदा॑शुषः । गय॑म् । कृ॒धि । प्र॒जाऽव॑तीः । इषः॑ ॥ ९.२३.३
Rigveda » Mandal:9» Sukta:23» Mantra:3
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:13» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:3
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमान) हे सबको पवित्र करनेवाले परमात्मन् ! (नः) हमको (अर्यः) जो भाव असुरों को (अदाशुषः) नहीं दिये, वे (गयम्) भाव (आ भर) देवें और (प्रजावतीः इषः) धनपुत्रादि ऐश्वर्यों को (कृधि) देवें ॥३॥
Connotation: - इस मन्त्र में परमात्मा का नाम है “ऋच्छति गच्छति सर्वत्र प्राप्नोति इत्यर्य्यः परमात्मा” जो सर्वत्र व्यापक हो, उस का नाम अर्य है। उस अर्य परमात्मा से यह प्रार्थना की गयी है कि हे परमात्मन् ! आप हमको दैवी सम्पत्ति के गुण दें अर्थात् हम को ऐसे पवित्र भाव दें, जिस से हम में आसुर भाव कदापि न आवे। जो पुरुष सदैव देवताओं के गुणों से सम्पन्न होने की प्रार्थना करते हैं, परमात्मा उन्हें सदैव दिव्य गुणों का दान देता है ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
प्रजावती: इषः
Word-Meaning: - [१] हे (पवमान) = पवित्र करनेवाले सोम ! तू (अर्य:) = स्वामी होता हुआ (अदाशुषः) = न देनेवाले के (गयम्) = [wealth] धन को (नः) = हमारे लिये (आभर) = प्राप्त करा । जिस समय शरीर में सोम का रक्षण करते हैं, उस समय यह सोम हमें उदार वृत्तिवाला बनाता है। तब हम धनों को दान में विनियुक्त करनेवाले होते हैं। हमारा धन लोकहित के कार्यों में व्ययित होता है । [२] हे सोम ! तू हमारे लिये (प्रजावती:) = प्रकृष्ट विकासवाली, विकास की साधनभूत (इषः) = प्रेरणाओं को (कृधि) = कर | तेरे रक्षण से हम पवित्र हृदयवाले बनें । उस पवित्र हृदय में हम उन प्रेरणाओं को सुनें जो कि हमें उत्तम मार्ग पर ले चलती हुई विकसित शक्तिवाला बनायें ।
Connotation: - भावार्थ- सब धनों का स्वामी 'सोम' है । सोम का रक्षक पुरुष सब धनों को प्राप्त करता है और विकास की कारणभूत प्रेरणाओं को सुनता है ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमान) हे सर्वेषां पावयितर्भगवन् ! (नः) अस्मभ्यं (अर्यः) ये भावाः (अदाशुषः) असुरेभ्यो न ददिरे ते (गयम्) भावाः (आ भर) दीयन्तां (प्रजावतीः इषः) धनपुत्राद्यैश्वर्यं च (कृधि) ददातु ॥३॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O Soma, lord of purity and power, socio-cosmic dynamics, production and munificence, win over the ungiving, uncreative and selfish people and give us all a peaceful home and food, energy, knowledge and wisdom for sustenance and happy continuance of the human family.
