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ए॒ते पृ॒ष्ठानि॒ रोद॑सोर्विप्र॒यन्तो॒ व्या॑नशुः । उ॒तेदमु॑त्त॒मं रज॑: ॥

English Transliteration

ete pṛṣṭhāni rodasor viprayanto vy ānaśuḥ | utedam uttamaṁ rajaḥ ||

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Pad Path

ए॒ते । पृ॒ष्ठानि॑ । रोद॑सोः । वि॒ऽप्र॒यन्तः॑ । वि । आ॒न॒शुः॒ । उ॒त । इ॒दम् । उ॒त्ऽत॒मम् । रजः॑ ॥ ९.२२.५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:22» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:12» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:5


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (एते) ये सब नक्षत्रादि (रोदसोः पृष्ठानि) पृथिवी और द्युलोक के मध्य में (विप्रयन्तः) चलते हुए (इदम् उत्तमम् रजः) इस उत्तम रजोगुण को (उत व्यानशुः) व्याप्त होते हैं ॥५॥
Connotation: - उक्त ब्रह्माण्डों की विविध रचना में परमात्मा ने इस प्रकार का आकर्षण और विकर्षण उत्पन्न किया है, जिसमें एक दूसरे के आश्रित होकर प्रतिक्षण गतिशील बन रहे हैं। वा यों कहो कि सत्त्व रज और तम प्रकृति के ये तीनों गुण अर्थात् प्रकृति की ये तीनों अवस्थायें जिस प्रकार एक दूसरे का आश्रयण करती हैं, इस प्रकार एक दूसरे को आश्रयण करता हुआ प्रत्येक ब्रह्माण्ड इस नभोमण्डल में वायुवेग से उत्तेजित तृण के समान प्रतिक्षण चल रहा है, कोई स्थिर नहीं ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

द्यावापृथिवी के पृष्ठ पर

Word-Meaning: - [१] (एते) = ये सोमकण (रोदसोः) = द्यावापृथिवी के (पृष्ठानि) = पृष्ठों को, शिखरों को (विप्रयन्तः) = विशेषरूप से प्राप्त होते हुए (व्यानशुः) = शरीर में व्याप्त होते हैं [अशू व्याप्तौ ] । द्यावापृथिवी के शिखरों पर जाने का भाव यह है कि मस्तिष्क व शरीर की उन्नति करना । सोमकण रोगकृमियों को नष्ट करके शरीर को स्वस्थ बनाते हैं, और मस्तिष्क की ज्ञानाग्नि को दीप्त करते हैं । [२] (उत) = और इस प्रकार शारीरिक व बौद्धिक उन्नति के द्वारा ये सोमकण (इदम्) = इस (उत्तमं रजः) = उत्तम लोक को व्याप्त करनेवाले होते हैं। सोमरक्षण से अन्ततः सर्वोत्तम लोक, अर्थात् ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है । यह सोम [वीर्य] उस सोम [प्रभु] की प्राप्ति का कारण बनता है ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें शारीरिक व बौद्धिक उन्नति के शिखर पर ले जाता हुआ ब्रह्मलोक को प्राप्त कराता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (एते) एतानि नक्षत्राणि (रोदसोः पृष्ठानि) द्यावापृथिव्योर्मध्यगतानि (विप्रयन्तः) गच्छन्ति सन्ति (इदम् उत्तमम् रजः) एतमुत्तमं रजोगुणं (उत व्यानशुः) व्याप्नुवन्ति ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Pressing forward on the journey all round, they cross the regions of heaven and earth and then reach the highest pinnacle of light and space in existence.