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ए॒ते धा॑व॒न्तीन्द॑व॒: सोमा॒ इन्द्रा॑य॒ घृष्व॑यः । म॒त्स॒रास॑: स्व॒र्विद॑: ॥

English Transliteration

ete dhāvantīndavaḥ somā indrāya ghṛṣvayaḥ | matsarāsaḥ svarvidaḥ ||

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Pad Path

ए॒ते । धा॒व॒न्ति॒ । इन्द॑वः । सोमाः॑ । इन्द्रा॑य । घृष्व॑यः । म॒त्स॒रासः॑ । स्वः॒ऽविदः॑ ॥ ९.२१.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:21» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:11» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब विराट् को परमात्मा के रथरूप से वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (एते सोमाः) हे परमात्मन् ! आप (धावन्ति) सर्वत्र व्याप्त हो रहे हैं (इन्दवः) स्वप्रकाश हैं (इन्द्राय घृष्वयः) विद्वानों द्वारा स्तुत्य हैं (मत्सरासः) प्रभुता के अभिमान से युक्त हैं और (स्वर्विदः) सुख के देनेवाले हैं ॥१॥
Connotation: - परमात्मा स्वयंप्रकाश और अपने प्रभुत्वभाव से सर्वत्रैव विराजमान है ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मत्सरासः स्वर्विदः

Word-Meaning: - [१] (एते) = ये (इन्दवः) = शक्ति को देनेवाले (सोमा:) = सोमकण (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (धावन्ति) = प्राप्त होते हैं [धाव् गतौ] । उसे प्राप्त होकर ये उसके शत्रुओं को (घृष्वयः) = नष्ट करनेवाले होते हैं, घिस देते हैं । [२] ये सोमकण शरीर में सुरक्षित होकर (मत्सरास:) = आनन्द का संचार करनेवाले हैं और (स्वर्विदः) = प्रकाश को व सुख को प्राप्त कराते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - जितेन्द्रियता सोमरक्षण का साधन है। रक्षित सोम 'शक्ति को देनेवाला, आधि- करनेवाला व प्रकाश को प्राप्त करानेवाला 'व्याधि रूप शत्रुओं को नष्ट करनेवाला, आनन्द का संचार है ।
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ARYAMUNI

अथ विराट् परमात्मनो रथरूपेण वर्ण्यते।

Word-Meaning: - (एते सोमाः) हे परमात्मन् ! भवान् ( धावन्ति) सर्वत्र व्याप्नोति (इन्दवः) स्वप्रकाशेन प्रकाशितश्च (इन्द्राय घृष्वयः) विद्वद्भिः स्तुत्यश्च (मत्सरासः) प्रभुत्वाभिमानी चास्ति (स्वर्विदः) सुखदश्च ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - These Soma streams of divine joy and exhilaration, agile, mirthful, ecstatic and refulgent, flow free in honour of Indra, lord of the beauty and glory of life.