अ॒भ्य॑र्ष बृ॒हद्यशो॑ म॒घव॑द्भ्यो ध्रु॒वं र॒यिम् । इषं॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥
English Transliteration
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abhy arṣa bṛhad yaśo maghavadbhyo dhruvaṁ rayim | iṣaṁ stotṛbhya ā bhara ||
Pad Path
अ॒भि । अ॒र्ष॒ । बृ॒हत् । यशः॑ । म॒घव॑य्त्ऽभ्यः । ध्रु॒वम् । र॒यिम् । इष॑म् । स्तो॒तृऽभ्यः । आ । भ॒र॒ ॥ ९.२०.४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:20» Mantra:4
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:10» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:4
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (मघवद्भ्यः) जो आपके उपासक धनादि ऐश्वर्यसम्पन्न हैं, उनके (रयिम् ध्रुवम्) धन को अचल सुरक्षित कीजिये और (बृहद्यशः) अत्यन्त यश को (अभ्यर्ष) दीजिये और (इषम् स्तोतृभ्यः आभर) जो आपके स्तोता हैं, उनके लिये धनादि ऐश्वर्य दीजिये ॥४॥
Connotation: - परमात्मा सदाचारी और संयमी पुरुषों के धनादि ऐश्वर्य और यश को दृढ करता है ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
यश-रयि-इष्
Word-Meaning: - [१] हे सोम ! तू हमारे जीवनों को पवित्र करके (बृहद् यशः) = उत्कृष्ट यश को (अभ्यर्ष) [ अभिगमय] = प्राप्त करा । [२] मघवद्भयः- [मघ-मख] यज्ञशील पुरुषों के लिये (ध्रुवं रयिम्) = स्थिर ऐश्वर्य को प्राप्त करा । सोमरक्षण से हम यज्ञों की वृत्तिवाले बनें । यज्ञशीलता से 'ध्रुव रिय' को प्राप्त करनेवाले हों। [३] हम (स्तोतृभ्यः) = स्तोताओं के लिये (इष) = प्रेरणा को (आभर) = सर्वथा प्राप्त करा । हम पवित्र हृदयों में प्रभु की प्रेरणा को सुननेवाले बनें ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से जीवन यशस्वी - स्थिर ऐश्वर्यवाला व प्रभु की प्रेरणा को सुननेवाला बनता है ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (मघवद्भ्यः) ये भवदुपासकाः धनाद्यैश्वर्यसम्पन्नाः तेषां (रयिम् ध्रुवम्) धनं सुस्थिरं करोतु तथा (बृहद्यशः) अत्यन्तयशः (अभ्यर्ष) प्रयच्छतु तथा (इषम् स्तोतृभ्यः आभर) स्वस्तोतृभ्यो धनाद्यैश्वर्यं ददातु ॥४॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Bring wide and expansive fame for the men of honour and generosity, bring wealth and power, bring food, energy, knowledge and excellence of mind and soul for the celebrants.
