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नि शत्रो॑: सोम॒ वृष्ण्यं॒ नि शुष्मं॒ नि वय॑स्तिर । दू॒रे वा॑ स॒तो अन्ति॑ वा ॥

English Transliteration

ni śatroḥ soma vṛṣṇyaṁ ni śuṣmaṁ ni vayas tira | dūre vā sato anti vā ||

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Pad Path

नि । शत्रोः॑ । सो॒म॒ । वृष्ण्य॑म् । नि । शुष्म॑म् । नि । वयः॑ । ति॒र॒ । दू॒रे । वा॒ । स॒तः । अन्ति॑ । वा॒ ॥ ९.१९.७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:19» Mantra:7 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:9» Mantra:7 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:7


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे परमात्मन् ! (शत्रोः) शत्रु के (वृष्ण्यम्) बल को (नितिर) नाश करिये और (नि शुष्मम्) तेज को तथा (वयः नि) अन्नादि ऐश्वर्य को नाश करिये, जो शत्रु (दूरे सतः) दूर में विद्यमान है (वा अन्ति) समीप में ॥७॥ इस मन्त्र में परमात्मा ने जीवों के भावद्वारा अन्यायकारी शत्रुओं के नाश करने का उपदेश किया है। जिस देश में अन्यायकारियों के नाश करने का भाव नहीं रहता, वह देश कदापि उन्नतिशील नहीं हो सकता ॥७॥ यह उन्नीसवाँ सूक्त और नवम वर्ग समाप्त हुआ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

नीरोग व निर्मल

Word-Meaning: - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (शत्रोः) = काम-क्रोध आदि शत्रुओं के (वृष्णयम्) = बल को (नितिर) = नष्ट कर । सोमरक्षण के द्वारा हम काम-क्रोध आदि शत्रुओं को निर्बल करके इन्हें विनष्ट कर सकें। [२] [शत्रोः] शरीर को विनष्ट करनेवाले रोगकृमिरूप शत्रुओं के (शुष्मम्) = शोषक बल को (नितिर) = नष्ट कर । रोगकृमियों के विनाश से हम स्वस्थ बनें। दूरे (वा सतः) = दूर होनेवाले, रोगकृमि रूप शत्रुओं की (वा) = तथा (अन्ति) = [सतः ] समीप होनेवाले 'मनसिज' काम आदि शत्रुओं की (वयः) = उमर को (नितिर) = नष्ट कर । अथवा (वयः) = [वय् गतौ ] इनकी गति को विनष्ट कर । इन रोगकृमि बाहर से हमारे पर आक्रमण करते हैं, काम-क्रोध आदि अन्दर 'दूरे वा सतः' तथा 'अन्ति वा सतः ' इन शब्दों से स्मरण किया है।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से हम आन्तरिक काम-क्रोध आदि शत्रुओं को तथा बाह्य रोगकृमि रूप शत्रुओं की गति को विनष्ट करके अपने जीवन को नीरोग व निर्मल बना पायें । इसी सोमरक्षण के लाभ को अगले सूक्त में देखिये-

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे परमात्मन् ! (शत्रोः) तव भक्तस्य रिपोः (वृष्ण्यम्) बलं (नितिर) नाशय तथा (नि शुष्मम्) तेजः तथा (वयः नि) अन्नाद्यैश्वर्यं नाशय यः शत्रुः (दूरे सतः) दूरे विद्यमानः (वा अन्ति) समीपे वा ॥७॥ एकोनविंशतितमं सूक्तं नवमो वर्गश्च समाप्तः ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, lord of peace, power and purification, negate, overcome and win over the exuberance, power and exploitation, and the spirit of the enemy’s enmity whether he is far or near.