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परि॒ यो रोद॑सी उ॒भे स॒द्यो वाजे॑भि॒रर्ष॑ति । मदे॑षु सर्व॒धा अ॑सि ॥
English Transliteration
Mantra Audio
pari yo rodasī ubhe sadyo vājebhir arṣati | madeṣu sarvadhā asi ||
Pad Path
परि॑ । यः । रोद॑सी॒ इति॑ । उ॒भे इति॑ । स॒द्यः । वाजे॑भिः । अर्ष॑ति । मदे॑षु । स॒र्व॒ऽधाः । अ॒सि॒ ॥ ९.१८.६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:18» Mantra:6
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:8» Mantra:6
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:6
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (यः) जो परमात्मा (उभे रोदसी) पृथिवी और आकाश इन दोनों लोकों में (वाजेभिः पर्यर्षति) ऐश्वर्यों के सहित व्याप्त है, वही (मदेषु) सब हर्षयुक्त वस्तुओं में (सर्वधाः) सब प्रकार की शोभा को धारण करानेवाला (असि) है ॥६॥
Connotation: - यद्यपि परमात्मा के ऐश्वर्य से कोई स्थान भी खाली नहीं, तथापि प्राकृत ऐश्वर्यों का स्थान जैसा द्युलोक और पृथिवीलोक है, ऐसा अन्य नहीं, इसी भाव से इन दोनों का वर्णन विशेष रीति से किया है ॥६॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
शक्ति सम्पन्न मस्तिष्क व शरीर
Word-Meaning: - [१] यह सोम वह है (यः) = जो (सद्यः) = शीघ्र ही उभे रोदसी इन दोनों द्यावापृथिवी को, मस्तिष्क व शरीर को (वाजेभिः) = शक्तियों के साथ (परि अर्षति) = समन्तात् प्राप्त होता है । सोम के द्वारा मस्तिष्क भी शक्ति सम्पन्न बनता है, शरीर भी । शक्ति सम्पन्न मस्तिष्क ज्ञान से दीप्त हो उठता है और शक्ति सम्पन्न शरीर तेजस्विता से चमक आता है। [२] हे सोम ! तू (मदेषु) = उल्लासों के होने पर (सर्वधाः असि) = सबका धारण करनेवाला है।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम मस्तिष्क व शरीर दोनों को शक्ति सम्पन्न बनाता है ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (य) यः परमात्मा (उभे रोदसी) उभयोरपि द्यावापृथिव्योर्मध्ये (वाजेभिः पर्यर्षति) सहैश्वर्येण व्याप्नोति स एव (मदेषु) सर्वहर्षयुक्तद्रव्येषु सर्वविधशोभानां धारकः (असि) अस्ति ॥६॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - You who always pervade the dynamics of both heaven and earth with food, energy and the spirit of evolution, are the sustainer and dispenser for all in bliss divine.
