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य इ॒मे रोद॑सी म॒ही सं मा॒तरे॑व॒ दोह॑ते । मदे॑षु सर्व॒धा अ॑सि ॥

English Transliteration

ya ime rodasī mahī sam mātareva dohate | madeṣu sarvadhā asi ||

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Pad Path

यः । इ॒मे इति॑ । रोद॑सी॒ इति॑ । म॒ही इति॑ । सम् । मा॒तरा॑ऽइव । दोह॑ते । मदे॑षु । स॒र्व॒ऽधाः । अ॒सि॒ ॥ ९.१८.५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:18» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:8» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:5


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यः) जो परमेश्वर (मातरा इव) जीवों की माता के समान (इमे मही रोदसी) इस महान् आकाश और पृथिवीलोक से (सम् दोहते) दूध के समान नाना प्रकार के धन रत्नादिकों को दुहता है (मदेषु) वही परमात्मा हर्षयुक्त वस्तुओं में (सर्वधाः) सब प्रकार की शोभा को धारण करानेवाला (असि) है ॥५॥
Connotation: - माता शब्द यहाँ उपलक्षणमात्र है, वास्तव में भाव यह है कि जीवों की माता-पिता के समान जो पृथिवीलोक और द्युलोक हैं, इनसे नानाविध भोग पैदा करनेवाला एकमात्र परमात्मा ही है, कोई अन्य नहीं ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

माता-पिता का पूरक पुत्र

Word-Meaning: - [१] सोम वह है (यः) = जो (इमे) = इन (मही रोदसी) = महत्त्वपूर्ण द्यावापृथिवी को (मातरा इव) = माता-पिता के समान (संदोहते) = सम्यक् प्रपूरित करता है। जैसे एक पुत्र माता-पिता की पूर्ति करनेवाला होता है [अथ यदैव जायां विन्दते उत प्रजायते, तर्हि हि सर्वो भवति श० ५। २ । १ । १० ] पति जाया को प्राप्त करके, सन्तान को जन्म देने पर पूर्ण होता है । एवं सन्तान माता-पिता को मानो पूर्णता प्राप्त कराता है, इसी प्रकार यह सोम मस्तिष्क व शरीर रूप [ द्यावापृथिवी] पिता- माता को पूर्णता प्राप्त करानेवाला होता है। [२] सुरक्षित होने पर (मदेषु) = उल्लासों की वर्तमानता में, हे सोम ! तू (सर्वधाः असि) = 'शरीर, मन व बुद्धि' सभी का धारण करनेवाला है ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम मस्तिष्क व शरीर की न्यूनताओं को दूर करता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यः) यः परमात्मा (मातरा इव) जीवानां मातेव (इमे मही रोदसी) आभ्यां महद्भ्यां द्युलोकपृथिवीलोकाभ्यां (सम् दोहते) पय इव नानाविधधनरत्नानि दोग्धि स एव (मदेषु) हर्षयुक्तसर्ववस्तुषु (सर्वधाः) सर्वविधशोभानां धारकः (असि) अस्ति ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - You who fill these great mother-like heaven and earth with the wealth of food and drink and obtain for us all nourishments from these are the sustainer and provider for all in bliss divine.