Go To Mantra

अति॒ त्री सो॑म रोच॒ना रोह॒न्न भ्रा॑जसे॒ दिव॑म् । इ॒ष्णन्त्सूर्यं॒ न चो॑दयः ॥

English Transliteration

ati trī soma rocanā rohan na bhrājase divam | iṣṇan sūryaṁ na codayaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

अति॑ । त्री । सो॒म॒ । रो॒च॒ना । रोह॑न् । न । भ्रा॒ज॒से॒ । दिव॑म् । इ॒ष्णन् । सूर्य॑म् । न । चो॒द॒यः॒ ॥ ९.१७.५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:17» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:7» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:5


Reads 376 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे परमात्मन् ! (त्री रोचना अति) आप तीनों लोकों को अतिकमण करके (रोहन् न) सर्वोपरि विराजमान होकर (दिवम् भ्राजसे) द्युलोक को प्रकाशित करते हैं (न) और (इष्णन्) सर्वत्र गतिशील होकर (सूर्यम् चोदयः) सूर्य को भी प्रेरणा करते हैं ॥५॥
Connotation: - परमात्मा की सत्ता से पृथिवी अन्तरिक्ष और द्यौ ये तीनों लोक स्थिर हैं और उसी की सत्ता में सूर्य चन्द्रमा आदि तेजस्वी पदार्थ सब स्थिर हैं अर्थात् उसी के नियम में विराजमान हैं, ‘भयादस्याग्निस्तपति भयात्तपति सूर्यः। भयादिन्द्रश्च वायुश्च मृत्युर्धावति पञ्चमः’ क० २।६ ॥५॥
Reads 376 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सूर्य-प्रेरण

Word-Meaning: - [१] हे (सोम) = सोम ! तू (त्री रोचना) = शरीर, हृदय व मस्तिष्क, पृथिवी, अन्तरिक्ष व द्युलोक इन तीन दीप्त लोकों को (अतिरोहन्) = उन्नत करके ऊपर उठता हुआ (दिवं न) = प्रकाशमय सूर्य के समान (भ्राजसे) = चमकता है। सोम के रक्षण से शरीर नीरोगता व तेजस्विता से चमकता है, हृदय निर्मलता से दीप्त हो उठता है और मस्तिष्क ज्ञान ज्योति से चमक उठता है । यह सोम का रक्षण करनेवाला सूर्य के समान चमक उठता है । [२] (इष्णन्) = गति करता हुआ तू (सूर्यं न) = सूर्य की तरह वर्तमान शरीरस्थ प्राणशक्ति को (चोदयः) = प्रेरित करता है।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम ज्ञान के सूर्य को उदित करता है और प्राणशक्ति का वर्धन करता है।
Reads 376 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे परमात्मन् ! (त्री रोचना अति) भवान् त्रीनपि लोकानतिक्रम्य (रोहन् न) सर्वोपरि विराजमानः (दिवम् भ्राजसे) द्युलोकं दीपयति (न) तथा (इष्णन्) सर्वं व्याप्नुवन् (सूर्यम् चोदयः) सूर्यमपि प्रेरयति ॥५॥
Reads 376 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, lord of light and bliss, rising as if higher and higher, you transcend the three worlds of earth, skies and the heavens and shower light and glory over the heavens, and then, in a state of passion as if, you animate the sun with power and fertility.