जुष्ट॒ इन्द्रा॑य मत्स॒रः पव॑मान॒ कनि॑क्रदत् । विश्वा॒ अप॒ द्विषो॑ जहि ॥
English Transliteration
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juṣṭa indrāya matsaraḥ pavamāna kanikradat | viśvā apa dviṣo jahi ||
Pad Path
जुष्टः॑ । इन्द्रा॑य । म॒त्स॒रः । पव॑मान । कनि॑क्रदत् । विश्वाः॑ । अप॑ । द्विषः॑ । ज॒हि॒ ॥ ९.१३.८
Rigveda » Mandal:9» Sukta:13» Mantra:8
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:2» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:8
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्द्राय) जो धर्मप्रिय विद्वानों का (जुष्टः) संगी है (मत्सरः) जो न्यायरूपी मद से मत्त है, वह (पवमानः) सबको पवित्र करनेवाला (कनिक्रदत्) सबको सदुपदेशदाता (विश्वा) सम्पूर्ण (अप द्विषः जहि) जो हमारे द्वेषादि हैं, उनको नाश करे ॥८॥
Connotation: - जो लोग ईश्वरपरायण होकर अपनी जीवनयात्रा करते हैं, परमात्मा उन के राग-द्वेषादि भावों को निवृत्त करता है ॥८॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
द्वेष-निराकरण
Word-Meaning: - [१] हे (पवमान) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाले सोम ! तू (जुष्टः) = प्रीतिपूर्वक सेवित हुआ हुआ (इन्द्राय) = इस जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (मत्सरः) = हर्ष के संचार को करनेवाला होता है । सोमरक्षण से जीवन में उल्लास की वृद्धि होती है । [२] हे सोम ! (कनिक्रदत्) = प्रभु के नामों का निरन्तर उच्चारण करता हुआ तू (विश्वाः द्विषः) = सब द्वेष की भावनाओं को (अपजहि) = सुदूर विनष्ट कर। सोमरक्षण से प्रभु स्मरण की वृत्ति उत्पन्न होती है और द्वेष की भावनायें दूर होती हैं।
Connotation: - भावार्थ-रक्षित सोम [क] उल्लास को पैदा करता है, [ख] हमारे मनों को प्रभु-प्रवण करता है, [ग] द्वेष को दूर करता है।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्द्राय) यो धर्मवतां विदुषां (जुष्टः) सहचरोऽस्ति (मत्सरः) यश्च न्यायमदेन मत्तश्च सः (पवमानः) सर्वस्य पावयिता (कनिक्रदत्) सर्वेभ्यः सदुपदेशदाता (विश्वा) कृत्स्नानि (अप द्विषः जहि) मम रागद्वेषानि नाशयतु सः ॥८॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Let the pure and purifying showers of soma in divine flow, dedicated to omnipotence and to humanity in love roar as a cloud of rain showers, and, O roaring showers, throw out all jealousies and enmities of the world far away from us.
