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नित्य॑स्तोत्रो॒ वन॒स्पति॑र्धी॒नाम॒न्तः स॑ब॒र्दुघ॑: । हि॒न्वा॒नो मानु॑षा यु॒गा ॥

English Transliteration

nityastotro vanaspatir dhīnām antaḥ sabardughaḥ | hinvāno mānuṣā yugā ||

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Pad Path

नित्य॑ऽस्तोत्रः । वन॒स्पतिः॑ । धी॒नाम् । अ॒न्तरिति॑ । स॒बः॒ऽदुघः॑ । हि॒न्वा॒नः । मानु॑षा । यु॒गा ॥ ९.१२.७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:12» Mantra:7 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:39» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:7


ARYAMUNI

Word-Meaning: - वह परमात्मा (नित्यस्तोत्रः) नित्यस्तुति करने योग्य है (वनस्पतिः) सब ब्रह्माण्डों का स्वामी है (धीनाम् अन्तः) बुद्धियों का अन्त है (सबः दुघः) अमृत से परिपूर्ण करनेवाला है (मानुषा युगा) और स्त्री-पुरुष के जोड़े को उत्पन्न करनेवाला है (हिन्वानः) सबका तृप्तिकारक है ॥७॥
Connotation: - बुद्धियों का अन्त उसको इस अभिप्राय से कथन किया गया है कि मनुष्य की बुद्धि उसके पारावार को नहीं पा सकती, इसलिये उसने मनुष्यों पर अत्यन्त करुणा करके अपने वेदरूपी ज्ञान का प्रकाश किया है ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'नित्य - स्तोत्र - वनस्पति' सोम

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र में वर्णित सोम (नित्यस्तोत्र:) = सदा प्रभु के स्तोत्रोंवाला होता है, अर्थात् सोमरक्षणवाला पुरुष प्रभु की स्तुति के प्रति झुकाववाला होता है । (वनस्पतिः) = यह सोम ज्ञानरश्मियों का स्वामी है [वन = a ray of light] सुरक्षित सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनकर ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है। तब ज्ञानरश्मियाँ चारों ओर फैलती हैं । [२] यह (सबर्दुघः) = ज्ञानदुग्ध का दोहन करनेवाला सोम (मानुषा युगा) = मानव दम्पतियों को, विचारशील पति-पत्नियों को (धीनां अन्तः) = ज्ञानपूर्वक किये जानेवाले कर्मों के अन्दर (हिन्वानः) = प्रेरित करता है । सोमरक्षण के होने पर हम ज्ञानदुग्ध का पान करते हैं। इस ज्ञानदुग्ध का पान करनेवाले पति-पत्नी सदा ज्ञानपूर्वक उत्तम यज्ञादि कर्मों में प्रवृत्त रहते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण के होने पर हम [१] सदा प्रभु-स्तवन की रुचिवाले, [२] ज्ञानरश्मियों को प्राप्त करनेवाले, [३] ज्ञानपूर्वक उत्तम कर्मों में प्रवृत्त होनेवाले होते हैं ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - स परमात्मा (नित्यस्तोत्रः) नित्यस्तवनीयः (वनस्पतिः) सर्वब्रह्माण्डाधिपतिः (धीनाम् अन्तः) बुद्धीनामवसानः (सबः दुघः) अमृतेन तर्पकश्च (मानुषा युगा) स्त्रीपुरुषयोर्युगलस्योत्पादकश्च (हिन्वानः) सर्वस्य तृप्तिकारकश्चास्ति ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma eternally sung in hymns of adoration, creator, protector and sustainer of nature, indwelling inspirer of mind, intelligence and will, giver of the nectar of nourishment and joy, inspires and fulfils the couples and communities of humanity as a friend and companion.