'नित्य - स्तोत्र - वनस्पति' सोम
Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र में वर्णित सोम (नित्यस्तोत्र:) = सदा प्रभु के स्तोत्रोंवाला होता है, अर्थात् सोमरक्षणवाला पुरुष प्रभु की स्तुति के प्रति झुकाववाला होता है । (वनस्पतिः) = यह सोम ज्ञानरश्मियों का स्वामी है [वन = a ray of light] सुरक्षित सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनकर ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है। तब ज्ञानरश्मियाँ चारों ओर फैलती हैं । [२] यह (सबर्दुघः) = ज्ञानदुग्ध का दोहन करनेवाला सोम (मानुषा युगा) = मानव दम्पतियों को, विचारशील पति-पत्नियों को (धीनां अन्तः) = ज्ञानपूर्वक किये जानेवाले कर्मों के अन्दर (हिन्वानः) = प्रेरित करता है । सोमरक्षण के होने पर हम ज्ञानदुग्ध का पान करते हैं। इस ज्ञानदुग्ध का पान करनेवाले पति-पत्नी सदा ज्ञानपूर्वक उत्तम यज्ञादि कर्मों में प्रवृत्त रहते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण के होने पर हम [१] सदा प्रभु-स्तवन की रुचिवाले, [२] ज्ञानरश्मियों को प्राप्त करनेवाले, [३] ज्ञानपूर्वक उत्तम कर्मों में प्रवृत्त होनेवाले होते हैं ।