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ऋ॒तं वद॑न्नृतद्युम्न स॒त्यं वद॑न्त्सत्यकर्मन् । श्र॒द्धां वद॑न्त्सोम राजन्धा॒त्रा सो॑म॒ परि॑ष्कृत॒ इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥

English Transliteration

ṛtaṁ vadann ṛtadyumna satyaṁ vadan satyakarman | śraddhāṁ vadan soma rājan dhātrā soma pariṣkṛta indrāyendo pari srava ||

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Pad Path

ऋ॒तम् । वद॑न् । ऋ॒त॒ऽद्यु॒म्न॒ । स॒त्यम् । वद॑न् । स॒त्य॒ऽक॒र्म॒न् । श्र॒द्धाम् । वद॑न् । सो॒म॒ । रा॒ज॒न् । धा॒त्रा । सो॒म॒ । परि॑ऽकृत । इन्द्रा॑य । इ॒न्दो॒ इति॑ । परि॑ । स्र॒व॒ ॥ ९.११३.४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:113» Mantra:4 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:26» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:7» Mantra:4


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ऋतं, वदन्) यज्ञादिकों का उपदेश करते हुए (ऋतद्युम्न) यज्ञकर्मरूप दीप्ति से दीप्तिमान् (सत्यं, वदन्) सत्य भाषण करनेवाले (सत्यकर्मन्) सत्य के आश्रित कर्म करनेवाले (राजन्) हे राजन् ! आप (श्रद्धां, वदन्) श्रद्धा का उपदेश करते हुए (सोम) सौम्यस्वरूपयुक्त (धात्रा) संसार को धारण करनेवाले (सोम, परिष्कृतः) परमात्मा से परिष्कार किये गये (इन्द्राय) राजा के लिये (इन्दो) हे परमात्मन् ! आप (परि, स्रव) राज्याभिषेक का निमित्त बनें ॥४॥
Connotation: - जो स्वयं यज्ञादि कर्म करता, औरों को यज्ञादि कर्म करने का उपदेश करता, ऐसे सत्यभाषण और सत्य के आश्रित कर्म करनेवाले राजा के राज्य को परमात्मा अटल बनाता है ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऋत-सत्य- श्रद्धा

Word-Meaning: - हे (ऋतद्युम्न) = सत्य ज्ञानवाले, सत्य ज्ञान को उत्पन्न करनेवाले, सोम ! तू (ऋतं वदन्) = हमारे जीवनों में ऋत को उच्चारित करता है। सोम के रक्षण से सत्य ज्ञान की उत्पत्ति होकर जीवन सत्यमय बन जाता है। हे (सत्यकर्मन्) = सत्य कमों वाले, सब क्रियाओं से असत्य को दूर करनेवाले, सोम ! तू (सत्यं वदन्) = हमारे जीवनों में सत्य का ही उच्चारण करता है । क्रियाओं को नियमपूर्वक करना 'ऋत' है, और उत्तम क्रियाओं को करना ही 'सत्य' है । हे राजन् जीवनों को दीप्त करनेवाले (सोम) = सोम ! तू (श्रद्धां वदन्) = हमारे जीवनों में श्रद्धा को कहनेवाला हो, हमारे जीवनों को श्रद्धामय बना। हमें उस प्रभु में पूर्ण आस्था है । हे (सोम) = सोम ! तू (धात्रा) = उस प्रभु के द्वारा, प्रभु स्मरण के द्वारा (परिष्कृतः) = निर्मल किया जाता है। प्रभु स्मरण हमें वासनाओं से बचाता है, और इस प्रकार सोम निर्मल बना रहता है । हे (इन्दो) = निर्मल सोम ! तू (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (परिस्त्रव) = शरीर में चारों ओर परिस्रुत हो । तेरे इस शरीर में धारण के होने पर ही हमारा जीवन 'ऋत, सत्य व श्रद्धा' वाला बन पाएगा।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें सत्य ज्ञान वाला, सत्य कर्मों वाला व श्रद्धामय बनाता है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ऋतं, वदन्)  यज्ञादिकमुपदिशन्  (ऋतद्युम्न)  हे  यज्ञकर्मजदीप्त्या दीप्तिमन्  (सत्यं, वदन्)  सत्यभाषणशीलः  (सत्यकर्मन्)  सत्यता- मनुसृत्य कर्मकर्ता  (राजन्)  हे राजन् !  भवान्  (श्रद्धां, वदन्) श्रद्धामुपदिशन्  (सोम)  हे सोम्यस्वभाव !  (धात्रा)  संसारधारकेण (सोम, परिष्कृतः) परमात्मना शोधितो भवान् (इन्द्राय)  इत्थंभूताय राज्ञे (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (परि, स्रव) अभिषेक- हेतुर्भवतु ॥४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, spirit of glory and majesty of the order, great with the light and lustre of truth, reflecting the truth and rectitude of the order, speaking the truth, doing things aright, reflecting divine faith in action and policy, shining bright and ruling, purified and consecrated by the universal divine ordainer, O Soma, flow for Indra, soul of the system in the service of divinity.