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उपा॑स्मै गायता नर॒: पव॑माना॒येन्द॑वे । अ॒भि दे॒वाँ इय॑क्षते ॥

English Transliteration

upāsmai gāyatā naraḥ pavamānāyendave | abhi devām̐ iyakṣate ||

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Pad Path

उप॑ । अ॒स्मै॒ । गा॒य॒त॒ । न॒रः॒ । पव॑मानाय । इन्द॑वे । अ॒भि । दे॒वान् । इय॑क्षते ॥ ९.११.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:11» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:36» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब उक्त परमात्मा के उपासन का प्रकार कथन करते हैं।

Word-Meaning: - (नरः) हे यज्ञ के नेता लोगों ! तुम (पवमानाय) सबको पवित्र करनेवाला (इन्दवे) ‘इन्दतीतीन्दुः’ और जो परम ऐश्वर्यवाला है, (उपास्मै) उसकी प्राप्ति के लिये (गायत) गायन करो, जो (अभि देवाँ इयक्षते) यज्ञादि कर्मों में विद्वानों की संगति को चाहता है ॥१॥
Connotation: - परमात्मा उपदेश करता है कि हे मनुष्यों ! तुम यज्ञादि कर्मों में विद्वानों की संगति करो और मिलकर अपने उपास्य देव का गायन करो ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सोम गुणगान

Word-Meaning: - [१] हे (नरः) = [नृ नये] उन्नतिपथ पर आगे बढ़नेवाले मनुष्यो ! (अस्मै इन्दवे) = इस सोम के लिये (उपगायता) = समीपता से गायन करो। अर्थात् इसके गुणों का स्मरण करो । यह सोम (पवमानाय) = पवित्र करनेवाला है, शरीर को जहाँ रोगों से रहित करता है, वहाँ मन को वासनाओं से शून्य बनाता है । सोमरक्षण के होने पर मनुष्य क्रोध आदि के वशीभूत नहीं होता । [२] उस सोम के गुणों का गायन करो, जो कि (देवान् अभि इयक्षते) = देवों की ओर हमें ले चलता है,देवों के साथ हमारा सम्पर्क करना चाहता है। अर्थात् सोम के द्वारा हमारे जीवन में दिव्य गुणों का वर्धन होता है ।
Connotation: - भावार्थ-सोम [वीर्य] हमें पवित्र बनाता है, हमारे जीवन में दिव्य गुणों का वर्धन करता है ।
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ARYAMUNI

सम्प्रति उक्तपरमात्मन उपासनाप्रकारः कथ्यते।

Word-Meaning: - (नरः) हे यज्ञनेतारः ! यूयं (पवमानाय) सर्वेषां पावयित्रे (इन्दवे) परमैश्वर्यवते (उपास्मै) अस्मै परमात्मने तदर्थमेव (गायत) वेदवाग्भिः स्तुत यः (अभि देवाँ इयक्षते) यज्ञादिकर्मसु विदुषः सङ्गमयितुमिच्छति ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O leading lights of humanity, to win the wealth of life’s joy, work and sing in thanks and adoration for this infinite fount of pure bliss which overflows and yearns to join and inspire the noble creative performers of yajna.