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दि॒वो ध॒र्तासि॑ शु॒क्रः पी॒यूष॑: स॒त्ये विध॑र्मन्वा॒जी प॑वस्व ॥

English Transliteration

divo dhartāsi śukraḥ pīyūṣaḥ satye vidharman vājī pavasva ||

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Pad Path

दि॒वः । ध॒र्ता । अ॒सि॒ । शु॒क्रः । पी॒यूषः॑ । स॒त्ये । विऽध॑र्मन् । वा॒जी । प॒व॒स्व॒ ॥ ९.१०९.६

Rigveda » Mandal:9» Sukta:109» Mantra:6 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:20» Mantra:6 | Mandal:9» Anuvak:7» Mantra:6


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (दिवः, धर्ता, असि) हे परमात्मन् ! आप द्युलोक के धारक और (सत्ये, विधर्मन्) सत्यरूप यज्ञ में (पीयूषः) अमृत हैं (शुक्रः) दीप्तिमान्, तथा (वाजी) बलस्वरूप आप (पवस्व) हमको पवित्र करें ॥६॥
Connotation: - द्युलोक का धारक, अमृत, देदीप्यमान तथा बलस्वरूप परमात्मा, जिसने सूर्य्य, चन्द्रमादि सब लोक-लोकान्तरों को निर्माण किया है, वही हम सबका एकमात्र उपास्य देव है, अन्य नहीं ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शुक्रः पीयूषः

Word-Meaning: - हे सोम ! तू (दिवः धर्ता असि) = मस्तिष्क रूप द्युलोक का धारण करनेवाला है। (शुक्रः) = हमारे जीवनों को दीप्त व निर्मल बनाता है। (पीयूषः) = तू जीवन के लिये अमृत है। शरीर में किसी प्रकार के रोगों को नहीं आने देता । (सत्ये) = उस सत्य प्रभु प्राप्ति के निमित्त जीवन में सत्य व्यवहार के निमित्त, तथा (विधर्मन्) = विशिष्ट धारण के निमित्त, सब अंग-प्रत्यंगों के स्वास्थ्य के निमित्त (वाजी) = शक्तिशाली तू पवस्व हमें प्राप्त हों ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम ही मस्तिष्क का धारण करता है। हमें दीप्ति व अमृतत्व प्राप्त कराता है। हमारे जीवन को सत्यमय बनाता हुआ हमारा धारण करता है ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (दिवः, धर्ता, असि) भवान् द्युलोकस्य धारकः (सत्ये, विधर्मन्) सत्यतायज्ञे (पीयूषः) अमृतमस्ति (शुक्रः) दीप्तिमान् (वाजी) बलवान् (पवस्व) मां पवित्रयतु ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - You are the sustainer of the heavenly regions of light, most blissful presence for experience in the yajna of truth and divine law, and the ultimate winner of the victory. Flow forth, divine Soma, purify and consecrate us in the presence.