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इन्दु॑: पविष्ट॒ चारु॒र्मदा॑या॒पामु॒पस्थे॑ क॒विर्भगा॑य ॥

English Transliteration

induḥ paviṣṭa cārur madāyāpām upasthe kavir bhagāya ||

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Pad Path

इन्दुः॑ । प॒वि॒ष्ट॒ । चारुः॑ । मदा॑य । अ॒पाम् । उ॒पऽस्थे॑ । क॒विः । भगा॑य ॥ ९.१०९.१३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:109» Mantra:13 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:21» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:7» Mantra:13


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दुः) प्रकाशस्वरूप परमात्मा (कविः) जो सर्वज्ञ है, वह (अपां, उपस्थे) कर्मों की सन्निधि में (भगाय) ऐश्वर्य्यप्राप्ति तथा (चारुः, मदाय) सर्वोपरि आनन्दप्राप्ति के लिये (पविष्ट) हमको पवित्र बनाता है ॥१३॥
Connotation: - इस मन्त्र का भाव यह है कि जो पुरुष यज्ञादि कर्म तथा अन्य सत्कर्म करते हैं, उन्हीं को परमात्मा पवित्र बनाता है, जिससे वह ऐश्वर्य्यप्राप्ति द्वारा आनन्दोपभोग करते हैं ॥१३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मदाय - भगाय

Word-Meaning: - (अपाम् उपस्थे) = कर्मों की गोद में, अर्थात् निरन्तर यज्ञादि उत्तम कर्मों में लगे रहने पर यह (इन्दुः) = हमें शक्तिशाली बनानेवाला सोम (पविष्ट) = प्राप्त होता है। यह (चारुः) = सुन्दर व कल्याण कर है, (मदाय) = जीवन में उल्लास के लिये है । यह सोम (कविः) = क्रान्तदर्शी होता हुआ, हमें सूक्ष्म व तीव्र बुद्धि वाला बनाता हुआ (भगाय) = ज्ञानैश्वर्य की प्राप्ति के लिये होता है।
Connotation: - भावार्थ - सोम 'इन्दु, चारु व कवि' है यह आनन्द व ज्ञानैश्वर्य को प्राप्त करानेवाला होता है
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दुः) प्रकाशस्वरूपः परमात्मा (कविः) यः सर्वज्ञः (अपां, उपस्थे) कर्मणां सन्निधौ (भगाय) ऐश्वर्य्यप्राप्तये (चारुः, मदाय) सर्वोपर्यानन्दप्राप्तये (पविष्ट) मां पुनातु ॥१३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indu, Soma spirit of refulgent divinity, blissful and poetically creative is the omniscient highest purifying and saving spirit and power for the sake of honour and joy on the basis of one’s own Karmic performance.