नृभि॑र्येमा॒नो ह॑र्य॒तो वि॑चक्ष॒णो राजा॑ दे॒वः स॑मु॒द्रिय॑: ॥
English Transliteration
Mantra Audio
nṛbhir yemāno haryato vicakṣaṇo rājā devaḥ samudriyaḥ ||
Pad Path
नृऽभिः॑ । ये॒मा॒नः । ह॒र्य॒तः । वि॒ऽच॒क्ष॒णः । राजा॑ । दे॒वः । स॒मु॒द्रियः॑ ॥ ९.१०७.१६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:107» Mantra:16
| Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:15» Mantra:1
| Mandal:9» Anuvak:7» Mantra:16
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (समुद्रियः) अन्तरिक्षदेशव्यापी (देवः) दिव्यस्वरूप (राजा) सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों का नियन्ता (विचक्षणः) सर्वद्रष्टा (हर्यतः) सर्वप्रिय परमात्मा (नृभिः) सदुपदेशक मनुष्यों द्वारा (येमानः) उपदेश किया हुआ कर्मयोगी के लिये शुभ फलों का प्रदाता होता है ॥१६॥
Connotation: - परमात्मा के ज्ञान से कर्मयोगी नानाविध फलों को लाभ करता है, यहाँ कर्मयोगी यह उपलक्षणमात्र है, वास्तव में ज्ञानयोगी, उद्योगी, तपस्वी और संयमी सब प्रकार के पुरुषों का यहाँ ग्रहण है ॥१६॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
राजा देवः समुद्रियः
Word-Meaning: - (नृभिः) = उन्नतिपथ पर चलानेवाले मनुष्यों से (येमानः) = नियम में किया जाता हुआ, संयत होता हुआ यह सोम (हर्यतः) = अत्यन्त स्पृहणीय होता है। (विचक्षणः) = यह विशेषरूप से शरीर का (द्रष्टा) = ध्यान करनेवाला होता है, इससे शरीर सुरक्षित रहता है। राजा यह हमारे जीवनों को दीप्त बनाता है (देवः) = प्रकाशमय व दिव्यगुण सम्पन्न करता है और (समुद्रियः) = उस आनन्दमय प्रभु की ओर ले जानेवाला है ।
Connotation: - भावार्थ- संयत सोम 'हर्यत विचक्षण-राजा - देव व समुद्रिय' है ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (समुद्रियः) अन्तरिक्षदेशव्यापी (देवः) दिव्यस्वरूपः (राजा) अखिलब्रह्माण्डनियन्ता (विचक्षणः) सर्वद्रष्टा (हर्यतः) सर्वप्रियः परमात्मा (नृभिः) सदुपदेशकैः (येमानः) उपदिष्टः कर्मयोगिने शुभफलप्रदाता भवति ॥१६॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Invoked and impelled by leading lights of intelligent humanity, graciously charming, all watching, self-refulgent divine light of life, omnipresent in the universe, it rolls for Indra, the soul.
