Go To Mantra

समी॑ व॒त्सं न मा॒तृभि॑: सृ॒जता॑ गय॒साध॑नम् । दे॒वा॒व्यं१॒॑ मद॑म॒भि द्विश॑वसम् ॥

English Transliteration

sam ī vatsaṁ na mātṛbhiḥ sṛjatā gayasādhanam | devāvyam madam abhi dviśavasam ||

Mantra Audio
Pad Path

सम् । ई॒म् इति॑ । व॒त्सम् । न । मा॒तृऽभिः॑ । सृ॒जत॑ । ग॒य॒ऽसाध॑नम् । दे॒व॒ऽअ॒व्य॑म् । मद॑म् । अ॒भि । द्विऽश॑वसम् ॥ ९.१०४.२

Rigveda » Mandal:9» Sukta:104» Mantra:2 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:7» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:7» Mantra:2


Reads 349 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (गयसाधनम्) ज्ञान का साधन जो परमात्मा है, (देवाव्यम्) देवों का रक्षक (मदम्) जो आनन्दस्वरूप है, (द्विशवसम्) जो बलिष्ठ है, (वत्सं, न) जो सर्वाभिव्यक्त शक्ति के समान है, (ईम्) इसको (मातृभिः, संसृजत) विद्वान् लोग बुद्धिवृत्ति द्वारा साक्षात्कार करते हैं ॥२॥
Connotation: - परमात्मा दैवीसम्पत्तिवाले पुरुषों को अपनी दिव्य शक्तियों से विभूषित करता है और जो लोग अनाचारी आसुरी भाव से सम्पन्न हैं, उनको परमात्मज्ञान की ज्योति से देवपुरुषों के समान लाभ नहीं होता। तात्पर्य्य यह है कि दिव्यपुरुषों में परमात्मा की ज्योति प्रतिबिम्बित होती है और तमरूप भावों से दूषित पुरुषों में नहीं ॥२॥
Reads 349 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

गयसाधनम्

Word-Meaning: - (वत्सं न) = जैसे बछड़े को (मातृभिः) = मातृभूत गौवें के साथ संसृष्ट करते हैं, उस माता के समीप बछड़ा सुरक्षित रहता है, इसी प्रकार (ई) = निश्चय से (गयसाधनम्) = प्राणशक्तियों के [गयः प्राणम्] सिद्ध करनेवाले इस सोम को (मातृभिः) = इन वेदमाताओं से संसृजत संसृष्ट करो। यह वेदाध्ययन [= ज्ञान की प्राप्ति] इन्हें सुरक्षित करनेवाली होगी। उस सोम को ज्ञान प्राप्ति से संसृष्ट करो जो कि (देवाव्यं) = सब दिव्यगुणों का रक्षक हो, (मदम्) = उल्लास का जनक है और (अभि द्विशवसम्) = हमें दोनों ज्ञान व शारीरिक शक्ति के बल को प्राप्त करानेवाला है। सुरक्षित सोम मस्तिष्क को ज्ञान से बलवान् तथा शरीर को शक्ति से बलवान् बनाता है।
Connotation: - भावार्थ- ज्ञान प्राप्ति में लगे रहने से सोम का रक्षण होता है। यह 'प्राणशक्ति, उल्लास, दिव्यगुण व ब्रह्मक्षत्र' का विकास करता है।
Reads 349 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (गयसाधनम्) ज्ञानसाधनं (देवाव्यम्) देवरक्षकम् (मदम्) आनन्दमयं (द्विशवसम्) महाबलिनं(वत्सं, न)सर्वाभिव्यक्तशक्तिमिव स्थितं  (ईम्) इमं  परमात्मानं  (मातृभिः,  संसृजत)  विद्वांसः  बुद्धिवृत्तिभिः  साक्षात्कुर्वन्ति ॥२॥
Reads 349 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - As mothers love, adore and adorn a child with beauty and ornaments, so energise and exalt Soma as versatile beauty and grace of life, protector of divinities, source of ecstasy and doubly strong both physically and spiritually.