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सखा॑य॒ आ नि षी॑दत पुना॒नाय॒ प्र गा॑यत । शिशुं॒ न य॒ज्ञैः परि॑ भूषत श्रि॒ये ॥

English Transliteration

sakhāya ā ni ṣīdata punānāya pra gāyata | śiśuṁ na yajñaiḥ pari bhūṣata śriye ||

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Pad Path

सखा॑यः । आ । नि । सी॒द॒त॒ । पु॒ना॒नाय॑ । प्र । गा॒य॒त॒ । शिशु॑म् । न । य॒ज्ञैः । परि॑ । भू॒ष॒त॒ । श्रि॒ये ॥ ९.१०४.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:104» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:7» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:7» Mantra:1


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सखायः) हे उपासक लोगों ! आप (आनिषीदत) यज्ञवेदी पर आकर स्थिर हों, (पुनानाय) जो सबको पवित्र करनेवाला है, उसके लिये (प्रगायत) गायन करो (श्रिये) ऐश्वर्य्य के लिये (शिशुम्) “यः शंसनीयो भवति स शिशुः” जो प्रशंसा के योग्य है, उसको (यज्ञैः)  ज्ञानयज्ञादि द्वारा (परिभूषत) अलंकृत करो ॥१॥
Connotation: - उपासक लोग परमात्मा का ज्ञानयज्ञादि द्वारा आह्वान करके उसके ज्ञान का सर्वत्र प्रचार करते हैं ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

घरों में मिलकर उपासना

Word-Meaning: - (सखायः) = हे मित्रो ! (आनिषीदत) = आकर नम्रता से आसीन होवो। मिलकर इस 'हविर्धान' [पूजागृह] में बैठो। (पुनानाय) = सब को पवित्र करनेवाले प्रभु का गायत गुणगान करो। प्रभु का स्तवन चित्तवृत्ति के शोधन के लिये आवश्यक है । (न) [संप्रति] = और अब (यज्ञैः) = इन उपासना यज्ञों से (शिशुम्) = [शो तनूकरणे] तुम्हारी बुद्धि को सूक्ष्म बनानेवाले इस सोम को परिभूषत शरीर के अंगों में ही चारों ओर अलंकृत करो। शरीरस्थ यह सोम ('श्रिये') = शोभा के लिये हो ।
Connotation: - भावार्थ - घरों में मिलकर प्रभु-पूजन करते हुए हम वातावरण को धार्मिक बनायें। इस प्रकार उपासनाओं द्वारा सोम का हम शरीर में रक्षण करें जिससे यह शोभा की वृद्धि का कारण बने ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सखायः) हे उपासकाः ! यूयं (आ, निषीदत)  यज्ञवेद्यामागत्य  विराजध्वं (पुनानाय) सर्वशोधकाय  परमात्मने (प्रगायत) साधुगानं कुरुत  (श्रिये)  ऐश्वर्याय  (शिशुम्, न)  शंसनीयमिव (यज्ञैः)  ज्ञानयज्ञादिभिः (परि, भूषत) अलङ्कुरुत ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Come friends, sit on the yajna vedi, sing and celebrate Soma, pure and purifying spirit of life, and with yajna exalt him like an adorable power for the grace and glory of life.