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परि॒ कोशं॑ मधु॒श्चुत॑म॒व्यये॒ वारे॑ अर्षति । अ॒भि वाणी॒ॠषी॑णां स॒प्त नू॑षत ॥

English Transliteration

pari kośam madhuścutam avyaye vāre arṣati | abhi vāṇīr ṛṣīṇāṁ sapta nūṣata ||

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Pad Path

परि॑ । कोश॑म् । म॒धु॒ऽश्चुत॑म् । अ॒व्यये॑ । वारे॑ । अ॒र्ष॒ति॒ । अ॒भि । वाणीः॑ । ऋषी॑णाम् । स॒प्त । नू॒ष॒त॒ ॥ ९.१०३.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:103» Mantra:3 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:6» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:3


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (मधुश्चुतम्) जो प्रेमरूपी माधुर्य्य का स्रोत (कोशम्) अन्तःकरण है (अव्यये) रक्षायुक्त (वारे) वरणीय जो स्थिर है, उसमें (परि, अर्षति) परमात्मा प्राप्त होता है और (वाणीः, अभि) भक्ति को लक्ष्य रखकर (ऋषीणाम्, सप्त) जो ज्ञानोन्द्रियों के सप्त छिद्र हैं, उनको (नूषत) विभूषित करता है ॥३॥
Connotation: - परमात्मा उपासक की ज्ञानेन्द्रियों को निर्मल करके उनमें शुद्ध ज्ञान प्रकाशित करता है ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

आनन्दमय कोश की ओर

Word-Meaning: - (अव्यये) = [अवि अय] विविध विषयों में न भटकनेवाले वारे-वासनाओं का निवारण करनेवाले पुरुष में यह सोम (मधुश्चतं कोशं परि) = आनन्द को संचारित करनेवाले कोश की ओर (अर्षति) = गतिवाला होता है। अर्थात् सोमी पुरुष अन्नमय आदि कोशों से ऊपर उठकर आनन्दमय कोश की ओर चलनेवाला होता है। उस इस सोम को (ऋषीणां) = वेदों की (सप्त वाणी) = सात छन्दों में कही गयी वाणियाँ (अभि नूषत) = स्तुत करती हैं। इन वेद वाणियों में सोम की महिमा का प्रतिपादन हुआ है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से हम अध्यात्मवृत्ति वाले बनकर अन्नमय आदि कोशों से ऊपर उठकर आनन्दमय कोश की ओर गति वाले होते हैं।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (मधुश्चुतम्)  प्रेमरूपमाधुर्यस्रोतः (कोशम्) अन्तःकरणं (अव्यये, वारे) रक्षायुक्तं  वरणीयं च तत्र परमात्मा  (पर्यर्षति)  विराजते (वाणीः, अभि)  भक्तिमभिलक्ष्य (ऋषीणाम्, सप्त) ज्ञानेन्द्रियाणां सप्तछिद्रान् (नूषत) अलङ्करोति ॥३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - In the protected heart core of the blessed soul overflowing with honey joy, the Soma presence vibrates, and hymnal voices of the seer sages in seven Vedic musical metres adore and glorify the divine presence in ecstatic response to the guiding spirit of divinity.