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अ॒स्य व्र॒ते स॒जोष॑सो॒ विश्वे॑ दे॒वासो॑ अ॒द्रुह॑: । स्पा॒र्हा भ॑वन्ति॒ रन्त॑यो जु॒षन्त॒ यत् ॥

English Transliteration

asya vrate sajoṣaso viśve devāso adruhaḥ | spārhā bhavanti rantayo juṣanta yat ||

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Pad Path

अ॒स्य । व्र॒ते । स॒ऽजोष॑सः । विश्वे॑ । दे॒वासः॑ । अ॒द्रुहः॑ । स्पा॒र्हाः । भ॒व॒न्ति॒ । रन्त॑यः । जु॒षन्त॑ । यत् ॥ ९.१०२.५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:102» Mantra:5 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:4» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:5


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अस्य) इस परमात्मा के (व्रते) नियम में (सजोषसः) संगत हुए (विश्वे, देवासः) सम्पूर्ण विद्वान् (अद्रुहः) द्रोहरहित होकर उक्त परमात्मा की उपासना करें, (यत्) यदि (रन्तयः) रमणशील उक्त विद्वान् (जुषन्त) उक्त परमात्मा की प्रीति से भक्ति करते हैं, (स्पार्हाः) तो संसार के अत्यन्त प्रिय करनेवाले (भवन्ति) होते हैं ॥५॥
Connotation: - जो लोग राग-द्वेषरहित होकर परमात्मा की भक्ति करते हैं, वे अपने सामर्थ्य से संसार का बहुत उपकार कर सकते हैं ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सर्वदेवमय स्पृहणीय जीवन

Word-Meaning: - (अस्य व्रते) = इस सोमरक्षण के कर्म के होने पर (सजोषसः) = समान रूप से प्रीति वाले (विश्वे देवासः) = सब देव (अद्रुहः) = द्रोहशून्य होते हैं । अर्थात् सोमरक्षण से जीवन सर्वदेवमय बनता है । (यत्) = जब (रन्तयः) = सोमरक्षण में प्रीति वाले होते हुए (जुषन्तः) = इस सोम का सेवन करते हैं तो (स्पार्हाः) = स्पृहणीय जीवनवाले (भवन्ति) = होते हैं । वस्तुतः सोमरक्षण ही जीवन को सुन्दर बनाता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से जीवन सर्वदेवमय व स्पृहणीय बनता है ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अस्य) अस्य परमात्मनः (व्रते) नियमे (सजोषसः) संगताः सन्तः (विश्वे, देवासः) सम्पूर्णविद्वांसः (अद्रुहः) द्रोहरहिताः सन्तः परमात्मानमुपासीरन् (यत्) यदि (रन्तयः) रमणशीलास्ते (जुषन्त) प्रेम्णा परमात्मानं भजन्ते तदा (स्पार्हाः) लोकस्यातिहितकारकाः (भवन्ति) भवन्ति ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Enjoined in the law and order of discipline of this Soma, all divinities of nature and nobilities of humanity, committed and free from malice and negativity, who join and rejoice in him command the enviable love and respect of the world.