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त्रीणि॑ त्रि॒तस्य॒ धार॑या पृ॒ष्ठेष्वेर॑या र॒यिम् । मिमी॑ते अस्य॒ योज॑ना॒ वि सु॒क्रतु॑: ॥

English Transliteration

trīṇi tritasya dhārayā pṛṣṭheṣv erayā rayim | mimīte asya yojanā vi sukratuḥ ||

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Pad Path

त्रीणि॑ । त्रि॒तस्य॑ । धार॑या । पृ॒ष्ठेषु॑ । आ । ई॒र॒य॒ । र॒यिम् । मिमी॑ते । अ॒स्य॒ । योज॑ना । वि । सु॒ऽक्रतुः॑ ॥ ९.१०२.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:102» Mantra:3 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:4» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:3


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (त्रितस्य, धारया) तीनों गुणों की धारणारूप शक्ति से (पृष्ठेषु) इस ब्रह्माण्ड में (त्रीणि) तीन प्रकार के भूतों को (ईरय) प्रेरणा करता हुआ परमात्मा (रयिं) ऐश्वर्य्य को (मिमीते) उत्पन्न करता है, (सुक्रतुः) शोभन प्रज्ञावाला परमात्मा (अस्य, योजना) इस ब्रह्माण्ड की योजना करता है ॥३॥
Connotation: - प्रकृति के सत्त्व, रज, तम, तीनों गुणों द्वारा परमात्मा इस ब्रह्माण्ड की रचना करता है ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

त्रीणि धारय

Word-Meaning: - हे सोम ! तू (त्रितस्य) = काम-क्रोध-लोभ को तैरनेवाले इस पुरुष के (त्रीणि धारय) = शरीर, मन व मस्तिष्क तीनों का धारण कर, इसे कर्म उपासना व ज्ञान वाला बना । इसके इन 'शक्ति-यज्ञ व ज्ञान' रूप (रयिम्) = ऐश्वर्यों को (पृष्ठेषु) = शिखरों पर (एरयः) = प्रेरित कर। यह सोमी पुरुष शक्ति यज्ञ व ज्ञान रूप ऐश्वर्यों के दृष्टिकोण से बड़ा उन्नत हो। यह (सुक्रतुः) = उत्तम 'शक्ति यज्ञ व प्रज्ञान' वाला पुरुष (अस्य) = इस सोम के (योजना) = शरीर के अंग-प्रत्यंग में मेल को वि मिमीते विशेष रूप से करनेवाला होता है। जितना जितना यह सोमरक्षण के लाभ को देखता है, उतना उतना सोम को अपने साथ जोड़ने की कामना वाला होता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमारे शरीर, मन व मस्तिष्क तीनों का धारण करता है यह 'शक्ति यज्ञ व प्रज्ञान' रूप ऐश्वर्यों को बढ़ाता है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (त्रितस्य, धारया)  गुणत्रयस्य  धारणाशक्त्या (पृष्ठेषु)  ब्रह्माण्डे (त्रीणि) त्रीणि भूतानि (ईरय) प्रेरयन् परमात्मा (रयिम्) ऐश्वर्यम् (मिमीते) उत्पादयति (सुक्रतुः)  सुप्रज्ञः स च (अस्य, योजना)  अस्य ब्रह्माण्डस्य योजनां करोति ॥३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - By three streams of the moving particles of matter, energy and mind does the triple master, Soma, move the dynamics of existence, and thus does the supreme high priest order and accomplish his cosmic plan.