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क्रा॒णा शिशु॑र्म॒हीनां॑ हि॒न्वन्नृ॒तस्य॒ दीधि॑तिम् । विश्वा॒ परि॑ प्रि॒या भु॑व॒दध॑ द्वि॒ता ॥

English Transliteration

krāṇā śiśur mahīnāṁ hinvann ṛtasya dīdhitim | viśvā pari priyā bhuvad adha dvitā ||

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Pad Path

क्रा॒णा । शिशुः॑ । म॒हीना॑म् । हि॒न्वन् । ऋ॒तस्य॑ । दीधि॑तिम् । विश्वा॑ । परि॑ । प्रि॒या । भु॒व॒त् । अध॑ । द्वि॒ता ॥ ९.१०२.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:102» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:4» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब परमात्मा के गुणों द्वारा उसकी उपासना कथन करते हैं। अब प्रकृति और जीवरूप से द्वैत का वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (शिशुः) अति प्रशंसनीय परमात्मा (महीनाम्) बड़े से बड़े पृथिव्यादि लोकों को (क्राणा) रचता हुआ (ऋतस्य) सच्चाई के (दीधितिम्) प्रकाश को (हिन्वन्) प्रेरित करता है और वह (विश्वा, परि) सब लोगों के ऊपर (प्रिया) प्रियभाव (भुवत्) प्रकट करता है (अध) और (द्विता) द्वैतभाव से प्रकृति और जीव द्वारा इस संसार की रक्षा करता है ॥१॥
Connotation: - इस मन्त्र में द्वैतवाद का वर्णन स्पष्टरीति से किया गया है ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

महीनां शिशुः

Word-Meaning: - (क्राणा) = शरीर में सुरक्षित सोम यज्ञों को करनेवाला होता है । सोमरक्षक पुरुष यज्ञिय वृत्ति वाला बनता है। यह (महीनां) = उपासकों की बुद्धि को (शिशुः) = तीव्र करनेवाला होता है [शो तनूकरणे] । (ऋतस्य) = सत्य वेदज्ञान के (दीधितिम्) = प्रकाश को (हिन्वन्) = अपने धारक के हृदय में प्रेरित करता है। इस प्रकार वृत्ति को यज्ञिय बनाकर, बुद्धि को तीव्र करके तथा सत्य ज्ञान की किरणों को प्रकाशित करके यह सोम (विश्वा प्रिया) = सब प्रिय वस्तुओं का (परिभुवत्) = व्यापन करनेवाला होता है (अध) = और अब (द्विता) = शरीर व मस्तिष्क दोनों का विस्तार करनेवाला होता है। यह सोम शरीर में शक्ति को व मस्तिष्क में दीप्ति को स्थापित करता है।
Connotation: - भावार्थ-सोम हमारी वृत्ति को यज्ञिय बनाता है, बुद्धि को तीव्र करता है, ज्ञान के प्रकाश को प्राप्त कराता है, सब प्रिय वस्तुओं का व्यापन करता हुआ शरीर को सबल व मस्तिष्क को ज्योतिर्मय करता है ।
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ARYAMUNI

अथ परमात्मनो गुणगुणिभावेन उपासनमुपदिश्यते। (अथ प्रकृतेर्जीवस्य च द्वैतं वर्ण्यते)

Word-Meaning: - (शिशुः)  प्रशस्यः स परमात्मा (महीनाम्)  महतः पृथिव्यादिलोकान् (क्राणा) रचयन् (ऋतस्य)  सत्यतायाः (दीधितिम्) प्रकाशं (हिन्वन्) प्रेरयति अथ च (विश्वा परि) सर्वजनेषु (प्रिया) प्रियत्वं (भुवत्) प्रकटयति (अध) अथ (द्विता) द्वैतभावेन जीवेन प्रकृत्या च लोकं रक्षति ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Maker of stars and planets, inspiring the light and law of the dynamics of existence, dear adorable giver of fulfilment, Soma rules over both spirit and nature, heaven and earth.