Go To Mantra
Viewed 374 times

य ओजि॑ष्ठ॒स्तमा भ॑र॒ पव॑मान श्र॒वाय्य॑म् । यः पञ्च॑ चर्ष॒णीर॒भि र॒यिं येन॒ वना॑महै ॥

English Transliteration

ya ojiṣṭhas tam ā bhara pavamāna śravāyyam | yaḥ pañca carṣaṇīr abhi rayiṁ yena vanāmahai ||

Mantra Audio
Pad Path

यः । ओजि॑ष्ठः । तम् । आ । भ॒र॒ । पव॑मान । श्र॒वाय्य॑म् । यः । पञ्च॑ । च॒र्ष॒णीः । अ॒भि । र॒यिम् । येन॑ । वना॑महै ॥ ९.१०१.९

Rigveda » Mandal:9» Sukta:101» Mantra:9 | Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:2» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:9


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमान) हे सबको पवित्र करनेवाले परमात्मन् ! (यः) जो यश (ओजिष्ठः) अत्यन्त ओजवाला है (श्रवाय्यम्) सुनने योग्य है, (यः) जो यश (पञ्च, चर्षणीः) पाँचों ज्ञानेन्द्रिय, अथवा पाँचों प्राणों को संस्कृत करता है, (येन) जिस परमात्मा के यश से (रयिम्) ऐश्वर्य्य को (वनामहै) हम प्राप्त हों (तं, आभर) उसको दीजिये ॥९॥
Connotation: - यहाँ परमात्मा के आनन्द को लाभ करके आनन्दित होने का वर्णन है ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ओजिष्ठ

Word-Meaning: - हे (पवमान) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाले सोम ! (य:) = जो तेरा (ओजिष्ठ:) = ओजस्वितम, हमें अधिक से अधिक शक्तिशाली बनानेवाला रस है (तम्) = उस (श्रवाय्यम्) = [श्रावसे उत्तमम्] ज्ञान- प्रापण में उत्तम, ज्ञानाग्नि के दीपन द्वारा ज्ञानवर्धक रस को (आभर) = हमारे लिये सर्वथा पुष्ट करिये । (सः) = जो रस (पञ्च-चर्षणी:) = पञ्चजनों को, पाँचों यज्ञों से युक्त जनों को (अभि) = आभिमुख्येन प्राप्त होता है यज्ञशीलता ही मनुष्य को वासनाओं से बचाकर सोमरक्षण के योग्य बनाती है । है सोम ! तू हमें उस रस को प्राप्त करा (येन) = जिससे कि (रयिम्) = सब अन्नमय आदि कोशों के ऐश्वर्यों को (वनामहै) = हम प्राप्त करें। इस सोमरस [वीर्यशक्ति] ने ही तो हमें 'तेज, वीर्य, ओजबल, मन्यु व सहस्' को प्राप्त कराता है।
Connotation: - भावार्थ- हमें वह सोम प्राप्त हो जो कि हमें 'ओजस्वी, ज्ञानी, यज्ञशील व ऐश्वर्ययुक्त' बनाता है ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमान) हे सर्वपावक भगवन् ! (यः, ओजिष्ठः) यद्यशः अतिशयौजआश्रयः (श्रवाय्यम्) श्रवणार्हं च (यः) यच्च (पञ्च, चर्षणीः, अभि) पञ्चानां ज्ञानेन्द्रियाणां प्राणानां वा संस्कर्ता (येन) येन यशसा (रयिं) ऐश्वर्यं (वनामहै) प्राप्नुवाम (तं, आ, भर) तद्यशो मह्यं देहि ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O pure and purifying Soma, bring us honour and excellence most lustrous and renowned, valued among all the five classes of people by which we may be able to win the real material and spiritual wealth of life.