यो धार॑या पाव॒कया॑ परिप्र॒स्यन्द॑ते सु॒तः । इन्दु॒रश्वो॒ न कृत्व्य॑: ॥
English Transliteration
Mantra Audio
yo dhārayā pāvakayā pariprasyandate sutaḥ | indur aśvo na kṛtvyaḥ ||
Pad Path
यः । धार॑या । पा॒व॒कया॑ । प॒रि॒ऽप्र॒स्यन्द॑ते । सु॒तः । इन्दुः॑ । अश्वः॑ । न । कृत्व्यः॑ ॥ ९.१०१.२
Rigveda » Mandal:9» Sukta:101» Mantra:2
| Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:1» Mantra:2
| Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:2
Reads 430 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (यः) जो परमात्मा (पावकया, धारया) अपवित्रताओं को दूर करनेवाली अपनी सुधामयी वृष्टि से (परिप्रस्यन्दते) सर्वत्र परिपूर्ण है (सुतः) और सर्वत्र अपने सत्, चित्, आनन्दस्वरूप से देदीप्यमान है और (कृत्व्यः) वह गतिशील (इन्दुः) सर्वव्यापक परमात्मा (अश्वः, न) विद्युत् के समान सर्वत्र अपनी सत्ता से परिपूर्ण है ॥२॥
Connotation: - यहाँ विद्युत् का दृष्टान्त केवल परमात्मा की पूर्णताबोधन करने के लिये आया है ॥२॥
Reads 430 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
अश्वो न कृत्व्यः
Word-Meaning: - (य:) = जो सोम है वह (सुतः) = उत्पन्न हुआ हुआ (पावकया) = पवित्रता को करनेवाली (धारया) = अपनी धारण शक्ति से (परिप्रस्यन्दते) = शरीर में चारों ओर गतिवाला होता है। शरीर में सुरक्षित सोम अंग- प्रत्यंग को पवित्र कर देता है । (इन्दुः) = यह शक्तिशाली सोम (अश्वः न) = युद्ध में घोड़े के समान जीवन संग्राम में (कृत्व्यः) = [कर्मणि साधुः] कर्मों में कुशल है। यह सोम ही हमें जीवन संग्राम में विजयी बनाता है।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम पवित्रता व संग्राम-विजय को प्राप्त कराता है।
Reads 430 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (यः) यः परमात्मा (पावकया, धारया) अपवित्रतापसारक- स्वसुधामयवृष्ट्या (परिप्रस्यन्दते) सर्वत्र परिपूर्णः (सुतः) स्वसच्चिदानन्दस्वरूपेण देदीप्यमानश्च। (कृत्व्यः) गतिशीलः सः (इन्दुः) सर्वव्यापकः परमात्मा (अश्वः, न) विद्युदिव सर्वत्र स्वसत्तया परिपूर्णः ॥२॥
Reads 430 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Brilliant and blissful Soma, when, filtered and exhilarated, vibrates and flows in clear purifying streams like waves of energy itself.
