परि॑ सुवा॒नास॒ इन्द॑वो॒ मदा॑य ब॒र्हणा॑ गि॒रा । सु॒ता अ॑र्षन्ति॒ धार॑या ॥
English Transliteration
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pari suvānāsa indavo madāya barhaṇā girā | sutā arṣanti dhārayā ||
Pad Path
परि॑ । सु॒वा॒नासः॑ । इन्द॑वः । मदा॑य । ब॒र्हणा॑ । गि॒रा । सु॒ताः । अ॒र्ष॒न्ति॒ । धार॑या ॥ ९.१०.४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:10» Mantra:4
| Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:34» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:4
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (परि, सुवानासः) संसार को उत्पन्न करता हुआ (इन्दवः) सर्वप्रकाशक परमात्मा (बर्हणा, गिरा) अभ्युदय देनेवाली वेदवाणी द्वारा (सुताः) वर्णन किया हुआ (धारया) अमृत की वृष्टि से (मदाय अर्षति) आनन्द को देता है ॥४॥
Connotation: - द्युभ्वादि अनेक लोकों को उत्पन्न करनेवाला परमात्मा अपनी पवित्र वेदवाणी द्वारा हमको नाना विध के आनन्द प्रदान करता है ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
बर्हणा -गिरा
Word-Meaning: - [१] (परि सुवानास:) [परितः सूयमानाः, षू प्रेरणे] = शरीर में चारों ओर प्रेरित किये जाते हुए सोम (इन्दवः) = सोमकण (मदाय) = जीवन में उल्लास के लिये होते हैं। वस्तुतः शरीर के अंग- प्रत्यंग की शक्ति को ये ठीक रखते हैं। यह शरीर रथ इनके कारण दृढ़ बना रहता है। इस प्रकार जीवन में उल्लास स्थिर रहता है । स्वास्थ्य के साथ ही उल्लास है । [२] (बर्हणा) = वासनाओं के उद्धर्हण के [विनाश के] द्वारा तथा (गिरा) = ज्ञान की वाणियों के द्वारा (सुताः) = शरीर में संपादित हुए सोम (धारया अर्षन्ति) = धारण शक्ति के साथ प्राप्ति करते हैं। सोम को शरीर में सुरक्षित रखने के दो सम्बन्ध हैं, [क] वासनाओं का उद्धर्हण [विनाश], [ख] ज्ञान की वाणियों में लगाव | इस प्रकार रक्षित हुआ हुआ सोम शरीर की शक्तियों का धारण करता है।
Connotation: - भावार्थ- वासनाओं के विनाश व ज्ञान प्राप्ति में तत्परता के द्वारा सोम को शरीर में सुरक्षित करके हम उल्लासमय जीवनवाले बनें।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (परिसुवानासः) संसारमुत्पादयन् (इन्दवः) सर्वप्रकाशकः परमात्मा (बर्हणा, गिरा) अभ्युदयं दधानया वेदवाचा (सुताः) वर्णितः (धारया) अमृतवर्षेण (मदाय, अर्षति) आनन्दं ददाति ॥४॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Streams of soma distilled and consecrated by the hallowed voice of the Veda flow round for the joy of mankind.
