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तमीं॑ हिन्वन्त्य॒ग्रुवो॒ धम॑न्ति बाकु॒रं दृति॑म् । त्रि॒धातु॑ वार॒णं मधु॑ ॥

English Transliteration

tam īṁ hinvanty agruvo dhamanti bākuraṁ dṛtim | tridhātu vāraṇam madhu ||

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Pad Path

तम् । ई॒म् । हि॒न्व॒न्ति॒ । अ॒ग्रुवः॑ । धम॑न्ति । बा॒कु॒रम् । दृति॑म् । त्रि॒ऽधातु॑ । वा॒र॒णम् । मधु॑ ॥ ९.१.८

Rigveda » Mandal:9» Sukta:1» Mantra:8 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:17» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:8


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (तम्) उस पुरुष को (अग्रुवः) उग्र गतियें (हिन्वन्ति) प्रेरणा करती हैं और (बाकुरम्) भासमान (दृतिम्) शरीर को वह पुरुष प्राप्त होता है, जिसमें (त्रिधातु) तीन प्रकार से (वारणम्) दुसरों का वारण करनेवाला (मधु) मधुमय शरीर मिलता है ॥८॥
Connotation: - जो पुरुष श्रद्धा के भाव रखनेवाले होते हैं, उनके सूक्ष्म, स्थूल और कारण तीनों प्रकार के शरीर दृढ और शत्रुओं के वारण करनेवाले होते हैं। अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक तीनों प्रकार के बल उन पुरुषों को आकर प्राप्त होते हैं, जो श्रद्धा का भाव रखते हैं ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'त्रिधातु- वारण- मधु' सोम

Word-Meaning: - [१] (तम्) = उस सोम को (ईम्) = निश्चय से (अग्रुवः) = अग्रगतिवाले पुरुष, उन्नतिपथ पर चलनेवाले पुरुष (हिन्वन्ति) = अपने अन्दर प्रेरित करते हैं । उन्नतिपथ पर चलनेवाले सोमरक्षण के लिये स्वभावतः प्रेरित होते हैं। इस सुरक्षित सोम से ही उन्होंने उज्ज्वल होना होता है । और उन्नतिपथ पर चलने की भावना उन्हें वासनाओं का शिकार नहीं होने देती । [२] ये व्यक्ति सोमरक्षण के द्वारा इस (बाकुरम्) = [भासमानं] तेजस्विता से चमकते हुए (दृतिम्) = चर्मपात्र रूप शरीर को (धमन्ति) = तेजस्विता की अग्नि से संयुक्त करते हैं [धा अग्निसंयोगे ] । सोमरक्षण इन्हें तेजस्वी व सोत्साह बनाता है । [३] यह सोम (त्रिधातु) = शरीर, मन व बुद्धि तीनों का धारण करनेवाला है। (वारणम्) = शरीरस्थ सब रोगों का निवारण करनेवाला है। और (मधु) = जीवन को मधुर बनानेवाला है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण के लिये सदा उन्नतिपथ पर चलने की भावना सहायक है। यह सोम 'त्रिधातु, वारण व मधु' है ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (तम्) तं पुरुषम् (अग्रुवः) उग्रगतयः (हिन्वन्ति) प्रेरयन्ति किञ्च (बाकुरम्) भासमानम् (दृतिम्) शरीरं स पुरुषः (धमन्ति) प्राप्नोति यत्र (त्रिधातु) प्रकारत्रयेण (वारणम्) अपरेषां वारकम् (मधु) मधुमयं शरीरं सङ्गच्छते ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - That thrice energised honey sweet and sanctified soma for the good of body, mind and soul, the ten prime senses and pranas receive and then stimulate the light of the soul within, which dispels the darkness of ignorance and eliminates the junk of negative fluctuations.