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व॒रि॒वो॒धात॑मो भव॒ मंहि॑ष्ठो वृत्र॒हन्त॑मः । पर्षि॒ राधो॑ म॒घोना॑म् ॥

English Transliteration

varivodhātamo bhava maṁhiṣṭho vṛtrahantamaḥ | parṣi rādho maghonām ||

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Pad Path

व॒रि॒वः॒ऽधात॑मः । भ॒व॒ । मंहि॑ष्ठः । वृ॒त्र॒हन्ऽत॑मः । पर्षि॑ । राधः॑ । म॒घोना॑म् ॥ ९.१.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:1» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:16» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:3


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (वरिवोधातमः) हे परमात्मन् ! आप सम्पूर्ण धनों के देनेवाले (भव) हो। ‘वरिव इति धननामसु पठितम्’ नि २।१०। (मंहिष्ठः) सर्वोपरि दाता हो (वृत्रहन्तमः) सब प्रकार के अज्ञानों के नाशक हो (मघोनाम्) सब प्रकार के ऐश्वर्य्यों के पूर्ण करनेवाले हो (राधः) धनों को (पर्षि) हमको दें ॥३॥
Connotation: - परमात्मा से सब ऐश्वर्य्यों की प्राप्ति होती है और परमात्मा ही अज्ञान से बचाकर मनुष्य को सन्मार्ग में ले जाता है, इसलिये सर्वोपरि देव परमात्मा से ऐश्वर्य की प्रार्थना करनी चाहिये ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वरिवोधातम' सोम

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! तू रक्षित हुआ हुआ शरीर में (वरिवोधातमः) = अधिक से अधिक वरणीय वसुओं [धनों] का धारण करनेवाला भव हो । (मंहिष्ठ:) = दातृतम हो, हमें दान की वृत्तिवाला बना । सोम-रक्षण करनेवाला पुरुष उदार बनता है । (वृत्रहन्तमः) = तू वासनाओं का अधिक से अधिक विनाशक हो। [२] हे सोम ! तू ही (मघोनाम्) = इन पापशून्य ऐश्वर्यवालों के [मा-अघ] (राधः) = कार्यसाधक ऐश्वर्य को (पर्षि) = प्राप्त करानेवाला हो । सोमरक्षण से वासना विनष्ट होती है, शक्ति का वर्धन होता है। इस प्रकार मनुष्य आवश्यक ऐश्वर्यों को प्राप्त करनेवाला बनता है, पर उन ऐश्वर्यों को वह सुपथ से ही कमाता है ।
Connotation: - भावार्थ - रक्षित हुआ हुआ सोम हमें उदार वृत्तिवाला बनाता है। तब वासनामय जीवनवाले न होने से हम सुपथ से ही धन कमाते हैं ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! त्वं (वरिवोधातमः) समस्तधनानां दाता (भव) भव, ‘वरिव इति धननामसु पठितम्’ निघण्टौ ॥२।१०॥ (मंहिष्ठः) सर्वोपरि दाता भव (वृत्रहन्तमः) निखिलज्ञानानां नाशको भव किञ्च (मघोनाम्) सर्वैश्वर्य्यपूरकम् (राधः) धनम् (पर्षि) अस्मभ्यं देहि ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Be the highest giver of the cherished wealth of life, mightiest munificent, and the destroyer of want, suffering and darkness. Sanctify the wealth of the prosperous and powerful with showers of peace, purity and generosity.