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आ त्वा॒ गिरो॑ र॒थीरि॒वास्थु॑: सु॒तेषु॑ गिर्वणः । अ॒भि त्वा॒ सम॑नूष॒तेन्द्र॑ व॒त्सं न मा॒तर॑: ॥

English Transliteration

ā tvā giro rathīr ivāsthuḥ suteṣu girvaṇaḥ | abhi tvā sam anūṣatendra vatsaṁ na mātaraḥ ||

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Pad Path

आ । त्वा॒ । गिरः॑ । र॒थीःऽइ॑व । अस्थुः॑ । सु॒तेषु॑ । गि॒र्व॒णः॒ । अ॒भि । त्वा॒ । सम् । अ॒नू॒ष॒त॒ । इन्द्र॑ । व॒त्सम् । न । मा॒तरः॑ ॥ ८.९५.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:95» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:30» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:10» Mantra:1


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रथीः इव

Word-Meaning: - [१] हे प्रभो ! (गिरः) = ये ज्ञानपूर्वक उच्चरित स्तुतिवाणियाँ (त्वा आ अस्थुः) = आपको प्राप्त होती हैं। ये हमें आपकी ओर लानेवाली होती हैं। हे (गिर्वणः) = स्तुतिवाणियों से सम्भजनीय प्रभो ! (सुतेषु) = शरीर में सोम का सम्पादन होने पर आप हमारे लिये (रथीः इव) = रथवान् की तरह होते हैं, एक रथवान् की तरह आप ही हमें लक्ष्य -स्थान पर पहुँचाते हैं। [२] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो! ये उपासक (त्वा) = आपको (अभि) = दिन के दोनों ओर प्रातः व सायं (समनूषत) = स्तुत करते हैं, (न) = जैसे (मातर:) = धेनुएँ (वत्सम्) = बछड़े की प्रति प्रेम से हम्भाख को करती हैं। ये उपासक भी प्रेम से स्तुति - वचनों का उच्चारण करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु का स्तवन करें। प्रातः - सायं प्रेम से किया गया यह प्रभु-स्तवन हमें लक्ष्य-स्थान पर पहुँचानेवाला होगा।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, adorable lord of glory, when the soma sense of life’s beauty and meaning is realised, let our voices of adoration reach you fast as a charioteer, and as mothers out of love incline to their children, so let our voices too closely abide with you.