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इन्द्र॑ इ॒षे द॑दातु न ऋभु॒क्षण॑मृ॒भुं र॒यिम् । वा॒जी द॑दातु वा॒जिन॑म् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
indra iṣe dadātu na ṛbhukṣaṇam ṛbhuṁ rayim | vājī dadātu vājinam ||
Pad Path
इन्द्रः॑ । इ॒षे । द॒दा॒तु॒ । नः॒ । ऋ॒भु॒क्षण॑म् । ऋ॒भुम् । र॒यिम् । वा॒जी । द॒दा॒तु॒ । वा॒जिन॑म् ॥ ८.९३.३४
Rigveda » Mandal:8» Sukta:93» Mantra:34
| Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:27» Mantra:4
| Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:34
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
ऋभुक्षणं ऋभुं' रयिं
Word-Meaning: - [१] (इन्द्रः) = वह परमैश्वर्यशाली प्रभु (नः) = हमें (इषे) = [ इष्णाति To strike, To unite ] रोग आदि शत्रुओं के विनाश के लिये (ऋभुक्षणम्) = महान् तथा (ऋभु) = [उरु भाति] ज्ञानदीप्ति से खूब चमकनेवाले (रयिम्) = ऐश्वर्य को (ददातु) = दें। हमें धन तो प्राप्त हो, पर हम उसका विनियोग भोग-विलास की वृद्धि में न करके यज्ञादि कर्मों व ज्ञान की वृद्धि में करें। [२] (वाजी) = वे शक्तिशाली प्रभु हमें (वाजिनम्) = शक्ति (ददातु) = दें। धन का ठीक विनियोग करते हुए हम अपने यश, ज्ञान व बल का वर्धन करें।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमें धन प्राप्त करायें। उस धन का यज्ञों में विनियोग करते हुए हम ज्ञान व बल का वर्धन करते हुए यशस्वी हों। भोगविलास में न फँसनेवाला व्यक्ति 'बिन्दु' बनता है। शरीर में उत्पन्न सोम को [बिन्दु To form a part] शरीर का ही भाग बनाता है । सोम का शरीर में व्याप्त करनेवाला यह 'बिन्दु' पवित्र बलवाला ‘पूत-दक्ष' होता है। यह 'बिन्दु पूतदक्ष' ही अगले सूक्त का ऋषि है- दशमोऽनुवाकः
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - For food, energy and knowledge, may Indra, lord of creativity, imagination and power, give us wealth, honour and excellence of broad, versatile and expert nature. May the lord of speed and victory grant us sustenance, energy and advanced success in our pursuit of progress.
