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भ॒द्रम्भ॑द्रं न॒ आ भ॒रेष॒मूर्जं॑ शतक्रतो । यदि॑न्द्र मृ॒ळया॑सि नः ॥

English Transliteration

bhadram-bhadraṁ na ā bhareṣam ūrjaṁ śatakrato | yad indra mṛḻayāsi naḥ ||

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Pad Path

भ॒द्रम्ऽभ॑द्रम् । नः॒ । आ । भ॒र॒ । इष॑म् । ऊर्ज॑म् । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो । यत् । इ॒न्द्र॒ । मृ॒ळया॑सि । नः॒ ॥ ८.९३.२८

Rigveda » Mandal:8» Sukta:93» Mantra:28 | Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:26» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:28


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

इष् व ऊर्ज्

Word-Meaning: - [१] हे (शतक्रतो) = अनन्त शक्ति व प्रज्ञानवाले प्रभो! आप (नः) = हमारे लिये (भद्रं भद्रम्) = कल्याणकारक व सुखजनक (इषम्) = प्रेरणा को व (ऊर्जम्) = बल व प्राणशक्ति को (आभर) = प्राप्त कराइये। हमें अपनी कल्याणी प्रेरणा को प्राप्त कराइये तथा उस प्रेरणा को जीवन में अनूदित करने की शक्ति भी दीजिये । [२] हे (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् प्रभो ! (यत्) = क्योंकि आप इस इष और ऊर्ज के द्वारा (नः) = हमें (मृडयासि) = सुखी करते हैं। प्रभु की उत्तम प्रेरणा व प्रेरणा को कार्यान्वित करने के लिये दी गई शक्ति हमें सुखी करती है।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु से हम कल्याणी प्रेरणा व शक्ति को प्राप्त करें।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord of infinite actions of grace, when you are kind to us and bless us with joy and well being, you give us food, energy, knowledge and enlightenment so that we may rise towards perfection as good human beings.