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इ॒ष्टा होत्रा॑ असृक्ष॒तेन्द्रं॑ वृ॒धासो॑ अध्व॒रे । अच्छा॑वभृ॒थमोज॑सा ॥

English Transliteration

iṣṭā hotrā asṛkṣatendraṁ vṛdhāso adhvare | acchāvabhṛtham ojasā ||

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Pad Path

इ॒ष्टाः । होत्राः॑ । अ॒सृ॒क्ष॒त॒ । इन्द्र॑म् । वृ॒धासः॑ । अ॒ध्व॒रे । अच्छ॑ । अ॒व॒ऽभृ॒थम् । ओज॑सा ॥ ८.९३.२३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:93» Mantra:23 | Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:25» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:23


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अवभृथ की ओर

Word-Meaning: - [१] इस जीवन में 'कर्णाविमौ नासिके चक्षणी मुखम्'-दो कान, दो नासिका छिद्र, दो आँखें व मुखरूप सात ऋषि [सप्त ऋषयः प्रतिहिताः शरीरे] प्रभु द्वारा (इष्टा:) = यज्ञों के करनेवाले (होत्राः) = सात होता (असृक्षत) = उत्पन्न किये गये हैं। ये सात ऋषि ही यज्ञों को करनेवाले सात होता हैं [येन यज्ञस्तायते सप्त होता ] । इसलिए सद्गृहस्थ सदा यज्ञशील बनते हैं और अध्वरे यज्ञों में (इन्द्रं वृधास:) = उस प्रभु का वर्धन करनेवाले होते हैं। इन यज्ञों के द्वारा ही तो प्रभु की प्राप्ति होती है। [२] ये सद्गृहस्थ (ओजसा) = ओजषिता के साथ (अवभृथम्) = अच्छा यज्ञान्त-स्नान की ओर बढ़ते हैं। अर्थात् इनका जीवन यज्ञमय ही बना रहता है और ये सफलता के साथ इन यज्ञों के द्वारा उस प्रभु का पूजन कर पाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम सब इन्द्रियों से यज्ञों को करते हुए प्रभु का अपने में वर्धन करें। हमारा जीवन यज्ञमय बना रहे।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Cherished and lovely offers of havi offered into the fire in the yajna of life exalt Indra, and with light and lustre lead the yajamana to the sanctifying bath on the completion of the yajna.