Viewed 293 times
अरं॑ त इन्द्र कु॒क्षये॒ सोमो॑ भवतु वृत्रहन् । अरं॒ धाम॑भ्य॒ इन्द॑वः ॥
English Transliteration
Mantra Audio
araṁ ta indra kukṣaye somo bhavatu vṛtrahan | araṁ dhāmabhya indavaḥ ||
Pad Path
अर॑म् । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । कु॒क्षये॑ । सोमः॑ । भ॒व॒तु॒ । वृ॒त्र॒ऽह॒न् । अर॑म् । धाम॑ऽभ्यः । इन्द॑वः ॥ ८.९२.२४
Rigveda » Mandal:8» Sukta:92» Mantra:24
| Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:19» Mantra:4
| Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:24
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
धामभ्यः अरम्
Word-Meaning: - [१] हे (वृत्रहन्) = वासनाओं को विनष्ट करनेवाले (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् प्रभो ! (सोमः) = यह सोम (ते कुक्षये) = आप से दी गई इस कुक्षि के लिये (अरं भवतुम्) = भूषित करनेवाला हो। यह सोम कुक्षि में ही सुरक्षित रहकर उसे भूषित करे। [२] हे प्रभो ! ये (इन्दवः) = सोमकण (धामभ्यः) = सब तेजों के लिये (अरम्) = पर्याप्त हों। इनके रक्षण से तेजस्विता का लाभ हो।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम शरीर को अलंकृत करे। सब तेजों को यह प्राप्त करानेवाला हो ।
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Indra, O lord of power and joy, destroyer of evil and suffering, let there be ample soma to fill the space in the womb of existence, and let the flow of soma be profuse for all the forms of existence.
