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आ नू॒नम॒श्विनो॒ॠषि॒: स्तोमं॑ चिकेत वा॒मया॑ । आ सोमं॒ मधु॑मत्तमं घ॒र्मं सि॑ञ्चा॒दथ॑र्वणि ॥

English Transliteration

ā nūnam aśvinor ṛṣiḥ stomaṁ ciketa vāmayā | ā somam madhumattamaṁ gharmaṁ siñcād atharvaṇi ||

Pad Path

आ । नू॒नम् । अ॒श्विनोः॑ । ऋषिः॑ । स्तोम॑म् । चि॒के॒त॒ । वा॒मया॑ । आ । सोम॑म् । मधु॑मत्ऽतमम् । घ॒र्मम् । सि॒ञ्चा॒त् । अथ॑र्वणि ॥ ८.९.७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:9» Mantra:7 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:31» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:2» Mantra:7


SHIV SHANKAR SHARMA

राज्य में विद्वान् का कर्तव्य कहते हैं।

Word-Meaning: - (ऋषिः) महाकवि मन्त्रद्रष्टा जन (नूनम्) अवश्य ही (अश्विनोः) धर्मपरायण राजा और अमात्यादिकों के यशोयुक्त (वामया) सुन्दर (स्तोमम्) गानग्रन्थ (चिकेत) रचें। तथा (मधुमत्तमम्) अतिशय मधुर (घर्मम्) क्षरणशील (सोमम्) सोमरस को (अथर्वणि) अग्नि में (सिञ्चात्) हवन करें ॥७॥
Connotation: - विद्वज्जन देश का इतिहास लिखें और स्वयं कर्म करते हुए अन्यों से करवावें ॥७॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ऋषिः) विद्वान् पुरुष (अश्विनोः, स्तोमम्) उन सेनाध्यक्ष सभाध्यक्ष के स्तोत्रों को (वामया) अपनी तीक्ष्णबुद्धि से (नूनम्) निश्चय (आचिकेत) जाने (मधुमत्तमम्) अतिमधुर (धर्मम्, सोमम्) यज्ञीय सोमरस को (अथर्वणि) हिंसारहित यज्ञकर्मों में (आसिञ्चात्) आसिक्त=सिद्ध करे ॥७॥
Connotation: - इस मन्त्र का भाव यह है कि सब नीतिज्ञ विद्वान् पुरुष क्षात्रबल=राजमर्यादा को भले प्रकार जानें, ताकि राजनियम के विरुद्ध चलकर दण्ड के भागी न हों और राजकीय पुरुषों का उत्तमोत्तम पदार्थों द्वारा सत्कार करें, जिससे वे सर्वत्र सत्कारार्ह सिद्ध हों ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मधुमत्तमं धर्मम्

Word-Meaning: - [१] (ऋषिः) = तत्त्वद्रष्टा-ज्ञानी पुरुष (नूनम्) = निश्चय से (अश्विनोः स्तोमम्) = प्राणापान के स्तवन को (वामया) = सुन्दर वाणी के द्वारा (आचिकेत) = सर्वथा करने के लिये जानता है। प्राणापान का स्तवन करता हुआ प्राणसाधना में प्रवृत्त होता है। [२] इस प्राणसाधना में प्रवृत्त होने के द्वारा यह ऋषि (अथर्वणि) [ न थर्वति = चरति ] = न डाँवाडोल होनेवाले चित्त के होने पर (सोमम्) = सोम शक्ति को (आसिञ्चात्) = अपने शरीर में ही सर्वतः सिक्त करता है। यह सोम (मधुमत्तमम्) = जीवन को अत्यन्त मधुर बनानेवाला है और (धर्मम्) = यह तेजस्विता ही तेजस्विता है, अपने रक्षक को तेजस्वी बनानेवाला है।
Connotation: - भावार्थ- हम प्राणापान के लाभों का स्तवन करते हुए प्राणसाधना द्वारा सोम की शरीर में ऊर्ध्वगति करनेवाले हों। यह सोम हमें माधुर्य व तेज प्राप्त करायेगा।

SHIV SHANKAR SHARMA

राज्ये विद्वत्कर्त्तव्यमाह।

Word-Meaning: - ऋषिः=महाकविर्मन्त्रदृष्टा। नूनमवश्यम्। अश्विनोः= यशोयुक्तम्। वामया=वामं सुन्दरं स्तोमम्। आचिकेत=अभिजानीयात्=विरचयेत्। कित ज्ञाने। छान्दसो लिट्। पुनः। मधुमत्तममतिशयेन मधुमन्तम्। घर्मम्=क्षरणशीलम्। सोमम्=सोमरसम्। अथर्वणि अग्नौ। आसिञ्चात्=जुहुयात् ॥७॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ऋषिः) विद्वान् (अश्विनोः, स्तोमम्) तयोः स्तोत्रं (वामया) वननीयबुद्ध्या (नूनम्) निश्चयम् (आचिकेत) सम्यग्जानीयात् (मधुमत्तमं) अतिमधुरम् (सोमम्) सोमरसम् (धर्मम्) यज्ञ सम्बन्धिनम् (अथर्वणि) हिंसारहितकर्मणि (आसिञ्चात्) आसिक्तं सिद्धं कुर्यात् ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - In truth, the visionary sage has realised the song and story of the Ashvins, radiations of life energy, in every detail from inception to completion by faithful intention and relentless application of mind, and he has fed the fire of his yajnic search and research with the sweetest and most vibrating soma of his life’s passion into the vedi.