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यन्ना॑सत्या भुर॒ण्यथो॒ यद्वा॑ देव भिष॒ज्यथ॑: । अ॒यं वां॑ व॒त्सो म॒तिभि॒र्न वि॑न्धते ह॒विष्म॑न्तं॒ हि गच्छ॑थः ॥

English Transliteration

yan nāsatyā bhuraṇyatho yad vā deva bhiṣajyathaḥ | ayaṁ vāṁ vatso matibhir na vindhate haviṣmantaṁ hi gacchathaḥ ||

Pad Path

यत् । ना॒स॒त्या॒ । भु॒र॒ण्यथः॑ । यत् । वा॒ । दे॒व॒ । भि॒ष॒ज्यथः॑ । अ॒यम् । वा॒म् । व॒त्सः । म॒तिऽभिः । न । वि॒न्ध॒ते॒ । ह॒विष्म॑न्तम् । हि । गच्छ॑थः ॥ ८.९.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:9» Mantra:6 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:31» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:2» Mantra:6


SHIV SHANKAR SHARMA

राजकर्त्तव्य का उपदेश देते हैं।

Word-Meaning: - (नासत्या) हे सत्यस्वभाव राजा और अमात्यवर्ग ! (यत्) जो आप दोनों (भुरण्यथः) सब मनुष्यों को पोसते हैं यद्वा (देवा) हे देव ! देवो (यत्) जो आप (भिषज्यथः) मनुष्यों की दवा करते करवाते हैं, उन आपको (अयम्+वाम्+वत्सः) यह अनाथ बालक (मतिभिः) मति के द्वारा (न+विन्धते) नहीं पाता है (हि) क्योंकि आप दोनों (हविष्मन्तम्) क्रियावान् पुरुष के निकट में ही (गच्छथः) जाते हैं ॥६॥
Connotation: - राजा राज्य में जहाँ-तहाँ भवन स्थापित कर असमर्थों को भोजनादिकों से रक्षा और क्रियावान् पुरुषों का साहाय्य किया करे ॥६॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (नासत्या, देव) हे सत्यकर्मवाले देव ! (यत्, भुरण्यथः) जो आप सबका पोषण करते (यद्, वा) और जो (भिषज्यथः) दण्ड द्वारा अथवा ओषधि द्वारा प्रजा को शान्त और नीरोग करते हैं, ऐसे आपको (अयम्, वाम्, वत्सः) यह आपकी वत्सरूप प्रजा (मतिभिः) केवल स्तुतियों से (न, विन्धते) नहीं पा सकती (हि) क्योंकि आप (हविष्मन्तम्) ऐश्वर्य्यवान् के समीप ही (गच्छथः) जाते हैं ॥६॥
Connotation: - हे सत्यवादी सभाध्यक्ष तथा सेनाध्यक्ष ! आप शासन तथा सहायता द्वारा सम्पूर्ण प्रजा को सन्तुष्ट रखते हैं। आप ऐसी कृपा करें कि हम लोग आपको प्राप्त होकर अपनी आवश्यकताओं को आप पर प्रकट कर सकें और आपके समीपी होकर उत्तम शिक्षाओं द्वारा उच्च पद को प्राप्त हों ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यन्नसत्या

Word-Meaning: - [१] हे (नासत्या) = हमारे जीवनों से सब असत्यों को दूर करनेवाले प्राणापानो! आप (यत्) = जब (भुरण्यथः) = हमारे सब रोगों की चिकित्सा करते हो, तो (अयम्) = यह (वाम्) = आपका (वत्सः) = प्रिय आराधक (मतिभिः) = केवल ज्ञानों से (न विन्धते) = आपको प्राप्त नहीं करता। (हि) = निश्चय से आप (हविष्मन्तम्) = दानपूर्वक अदन करनेवाले व्यक्ति को (गच्छथः) = प्राप्त होते हो। [२] प्राणसाधना करनेवाला पुरुष यह अच्छी तरह समझ लेता है कि ये प्राणापान हमारा पालन करते हैं, ये ही हमारे सब रोगों को दूर करते हैं। ऐसा समझता हुआ यह पुरुष केवल प्राणों का स्तवन ही नहीं करता रहता। यह इस स्तवन के साथ त्यागपूर्वक अदन की वृत्तिवाला बनकर प्राणसाधना में प्रवृत्त होता है । 'हविष्मान्' बनता है।
Connotation: - भावार्थ- प्राणापान हमारा पालन करते हैं, सब रोगों की चिकित्सा करते हैं। इनका हम स्तवन करें तथा त्यागपूर्वक अदनवाले बनकर हम प्राणसाधना में प्रवृत्त हों ।

SHIV SHANKAR SHARMA

राजकर्त्तव्यमाह।

Word-Meaning: - हे नासत्या=नासत्यौ=हे सत्यस्वभावौ राजानौ ! यद्=यौ युवाम्। भुरण्यथः=सर्वान् मनुष्यान् पोषयथः। भुरण् धारणपोषणयोः। हे देवा=देवौ। यद्वा=यौ च युवाम्। भिषज्यथः=मनुष्यजाते रोगोपशमनं कुरुथः। भिषज् चिकित्सायाम्। तौ=वाम्। अयं वत्सः पालनीयः शिशुः। मतिभिर्बुद्धिभिर्द्वारभूताभिः। न विन्धते=न विन्दते=न लभ्यते। वर्णविकारश्छान्दसः। कुत इति चेदुच्यते। हि=यस्मात्। युवाम्। हविष्मन्तं क्रियावन्तं पुरुषं गच्छथः। न केवलं ज्ञानवन्तम् ॥६॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (नासत्या, देव) हे सत्यकर्माणौ देवौ ! (यत्, भुरण्यथः) यद्युवां जगत् पालयथः (यद्, वा) यच्च (भिषज्यथः) दण्डदानेन ओषधिदानेन वा प्रजां शान्तां नीरोगां च कुरुथः अतः (अयं, वाम्, वत्सः) अयं ते वत्सः प्रजा (मतिभिः) केवलस्तुतिभिः (न) नहि (विन्धते) विन्दते (हि) यतः (हविष्मन्तं) ऐश्वर्यवन्तम् (गच्छथः) याथः ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, harbingers of energy, health and replenishment, ever true unfailing agents of natural law and life’s growth, when you vibrate, radiate and energise, when you nourish, heal, resuscitate and revive things to live and grow, this conscientious darling seeker of your power and presence understands you not by observation, analysis and thought, in your entirety, because you reveal yourself only to the faithful who come to you with homage. (Life is a mystery. You can know the secret of this mystery only by being what it is, by identifying with it in meditation.)