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यदिन्द्रे॑ण स॒रथं॑ या॒थो अ॑श्विना॒ यद्वा॑ वा॒युना॒ भव॑थ॒: समो॑कसा । यदा॑दि॒त्येभि॑ॠ॒भुभि॑: स॒जोष॑सा॒ यद्वा॒ विष्णो॑र्वि॒क्रम॑णेषु॒ तिष्ठ॑थः ॥

English Transliteration

yad indreṇa sarathaṁ yātho aśvinā yad vā vāyunā bhavathaḥ samokasā | yad ādityebhir ṛbhubhiḥ sajoṣasā yad vā viṣṇor vikramaṇeṣu tiṣṭhathaḥ ||

Pad Path

यत् । इन्द्रे॑ण । स॒रथ॑म् । या॒थः । अ॒श्वि॒ना॒ । यत् । वा॒ । वा॒युना॑ । भव॑थः । सम्ऽओ॑कसा । यत् । आ॒दि॒त्येभिः॑ । ऋ॒भुऽभिः॑ । स॒ऽजोष॑सा । यत् । वा॒ । विष्णोः॑ । वि॒ऽक्रम॑णेषु । तिष्ठ॑थः ॥ ८.९.१२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:9» Mantra:12 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:32» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:2» Mantra:12


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः राजकर्तव्य कहते हैं।

Word-Meaning: - (अश्विना) हे पुण्यवान् राजा औ अमात्यादिवर्ग ! आप दोनों (यद्) यदि (इन्द्रेण) सभाध्यक्ष मन्त्री के साथ (सरथम्) एक रथ पर (याथः) विराजमान हों। (यद्वा) यद्वा (वायुना) वायुसमान सर्वत्र प्रवेशकारी किसी दूत के साथ (समोकसा) किसी भवन में (भवथः) विचार करते हों (यद्) यद्वा (आदित्यैः) सूर्यवत् प्रतापी सैन्यगणों के साथ यद्वा (ऋभुभिः) कलाकुशल पुरुषों के साथ (सजोषसा) आनन्द करते हों (यद्वा) यद्वा (विष्णोः) वनादिक के (विक्रमणेषु) भ्रमण में (तिष्ठथः) विद्यमान हों। कहीं पर हों, प्रजा की आवश्यकता होने पर वहाँ शीघ्र आ जावें ॥१२॥
Connotation: - यदि कोई प्रजा आपत्ति में प्राप्त होकर राजा को बुलावे, तो राजा सर्व आवश्यक कार्यों को छोड़ प्रथम उस प्रजा का उस आपत्ति से उद्धार करे ॥१२॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अश्विना) हे सेनाध्यक्ष तथा सभाध्यक्ष ! आप (यत्, इन्द्रेण, सरथम्, याथः) कदाचित् सम्राट् के सहित चलते हैं (यद्, वा) अथवा कभी (वायुना) शीघ्रगामी शूर के (समोकसा) समान स्थान में (भवथः) रहते हैं (यद्, आदित्येभिः, ऋभुभिः) सत्यतायुक्त राजाओं की (सजोषसा) मैत्री के साथ रहते हैं (यद्, वा) अथवा (विष्णोः, विक्रमणेषु) सूर्य से प्रकाशित यावत् देशों में (तिष्ठथः) स्वतन्त्र विचरते हैं ॥१२॥
Connotation: - हे श्रीमान् सभाध्यक्ष तथा सेनाध्यक्ष ! सम्राट् के सहगामी तथा उनके समीपवर्ती होने के कारण आप हमारी अभीष्ट कामनाओं को पूर्ण करें, जिससे हमारे याज्ञिक कार्य्य सफलतापूर्वक पूर्ण हों ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

इन्द्र-वायु-आदित्य-विष्णु

Word-Meaning: - [१] प्राणसाधना हमें जितेन्द्रिय बनाती है। इस बात को इस रूप में कहते हैं कि हे (अश्विना) = प्राणापानो! आपकी साधना के होने पर समय आता है (यत्) = जब कि (इन्द्रेण) = जितेन्द्रिय पुरुष के साथ (सरथं याथः) = समान रथ में गति करते हो । शरीर ही रथ है। इसमें जितेन्द्रिय पुरुष का प्राणों के साथ निवास होता है। (यद् वा) = अथवा आप (वायुना) = वायु के साथ [वा गतौ ] गतिशील पुरुष के साथ (सं ओकसा) = समान गृहवाले (भवथः) = होते हो। अर्थात् प्राणसाधना हमारे जीवनों को बड़ा क्रियाशील बनाती है। [२] हे प्राणापानो ! (यत्) = जब आप (ऋभुभिः) - [उरु भान्ति, ऋतेनभान्ति] खूब ज्ञान - ज्योति से दीप्त होनेवाले (आदित्येभिः) = सब ज्ञानों का आदान करनेवाले पुरुषों के साथ (सजोषसा) = प्रीतियुक्त होते हो, (यद् वा) = अथवा आप विष्णो व्यापक उन्नति करनेवाले पुरुष के (विक्रमणेषु) = [त्रीणि पदा विचक्रमे विष्णुः०] विक्रमणों में, तीन पदों में (तिष्ठथः) = स्थित होते हो। शरीर को 'तैजस' बनाना ही इस विष्णु का प्रथम पद है। मन को 'वैश्वानर' [= सब मनुष्यों के हित की भावनावाला] बनाना दूसरा पद है। मस्तिष्क को 'प्राज्ञ' बनाना नीसरा ये सब पद प्राणसाधना से ही रखे जाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना हमें 'जितेन्द्रिय, क्रियाशील, ज्ञानदीप्त व व्यापक उन्नतिवाला (विष्णु) ' बनाती है।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुना राजकर्त्तव्यमाह।

Word-Meaning: - हे अश्विना=हे अश्विनौ=पुण्यकृतौ राजानौ ! यद्=यदि युवाम्। इन्द्रेण=सभाध्यक्षेण मन्त्रिणा सह। सरथम्=समानमेकरथमास्थाय। याथः=गच्छथः। यद्वा। यदि। वायुना=वायुवत् सर्वत्र प्रवेशकारिणा दूतेन सह। समोकसा=समाननिवासौ। भवथः। यद्वा। यद्=यदि। आदित्यैः=आदित्यवत् प्रतापिभिः सैन्यैः सह। यद्वा। ऋभुभिः=कलाकुशलैर्विद्वद्भिः सह। सजोषसा=सजोषसौ सह प्रीयमाणौ। वर्तेथे। यद्वा=यदि। विष्णोः=विस्तीर्णस्य वनादेः। विक्रमणेषु=भ्रमणेषु। कस्मिंश्चिदपि स्थाने युवां तिष्ठथः। अतः सर्वस्मादपि स्थानात् प्रजानामाह्वाने सति। आगच्छथः ॥१२॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अश्विना) हे अश्विनौ ! युवाम् (यत्, इन्द्रेण, सरथम्, याथः) सम्राजा सहरथेन कदाचिद्गच्छथः (यद्, वा) अथवा (वायुना) शीघ्रगामिशूरेण (समोकसा) सस्थानौ (भवथः) भवथः (यद्, आदित्येभिः, ऋभुभिः) कदा सत्यवादिभी राजभिः (संजोषसा) सप्रेमाणौ भवथः (यद्, वा) अथवा (विष्णोः, विक्रमणेषु) सूर्यस्य प्रकाश्येषु देशेषु (तिष्ठथः) स्वतन्त्रं वर्तेथे ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Whether you move with the cosmic force on the same chariot or abide with the wind in the same region, or you move across the sun’s zodiacs or with the cosmic makers, or you move and abide with the vibrance of the omnipresent, wherever you be, pray come to us too.