Go To Mantra
Viewed 404 times

नकि॒: परि॑ष्टिर्मघवन्म॒घस्य॑ ते॒ यद्दा॒शुषे॑ दश॒स्यसि॑ । अ॒स्माकं॑ बोध्यु॒चथ॑स्य चोदि॒ता मंहि॑ष्ठो॒ वाज॑सातये ॥

English Transliteration

nakiḥ pariṣṭir maghavan maghasya te yad dāśuṣe daśasyasi | asmākam bodhy ucathasya coditā maṁhiṣṭho vājasātaye ||

Mantra Audio
Pad Path

नकिः॑ । परि॑ष्टिः । म॒घ॒ऽव॒न् । म॒घस्य॑ । ते॒ । यत् । दा॒शुषे॑ । द॒श॒स्यसि॑ । अ॒स्माक॑म् । बो॒धि॒ । उ॒चथ॑स्य । चो॒दि॒ता । मंहि॑ष्ठः॑ । वाज॑ऽसातये ॥ ८.८८.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:88» Mantra:6 | Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:11» Mantra:6 | Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:6


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दाशुषे दशस्यसि

Word-Meaning: - [१] हे (मघवन्) = ऐश्वर्यशालिन् प्रभो ! (ते) = आपके (मधस्य) = ऐश्वर्य का (नकिः परिष्टिः) = कोई भी रोकनेवाला [परिबाधकः] नहीं है, (यद्) = जब (दाशुषे) = दानशील पुरुष के लिये आप (दशस्यसि) = देते हैं। प्रभु जब दाश्वान् को धन प्राप्त कराते हैं, तो कोई रोक थोड़े ही सकता है। [२] हे प्रभो ! आप (अस्माकम्) = हमारा (बोधि) = [बुध्यस्व] ध्यान करिये आप ही (उचथस्य चोदिता) = स्तोत्रों के प्रेरक हैं। आपकी प्रेरणा से ही हम स्तवन में प्रवृत्त हो पाते हैं। आप (मंहिष्ठः) = सर्वमहान् दाता हैं। आप ही (वाजसातये) = शक्ति को प्राप्त कराने के लिये होते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु दानशील पुरुष को धन प्राप्त कराते हैं। वे हमारे जीवनों में स्तोत्रों के प्रेरक होते हैं। वे सर्वमहान् दाता प्रभु हमें शक्ति को प्राप्त कराते हैं। यह दानशील पुरुष 'नृ-मेध' बनता है - सब पुरुषों के साथ मेलवाला होता है। इसका यह मेल पालन व पूरण के लिये होता है, सो यह 'पुरुमेध' कहलाता है। यह सब से यही कहता है कि हम प्रभु का गायन करें-

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Lord of world’s wealth, power, honour and excellence, when you bless the generous devotee with the gift of your profusion, there is no restraint on your will and power. O lord most glorious and adorable, inspirer and intensifier of our adoration, let us know the paths for our noble movement forward for the sake of real victory and progress.