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यु॒ञ्जाथां॒ रास॑भं॒ रथे॑ वी॒ड्व॑ङ्गे वृषण्वसू । मध्व॒: सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥

English Transliteration

yuñjāthāṁ rāsabhaṁ rathe vīḍvaṅge vṛṣaṇvasū | madhvaḥ somasya pītaye ||

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Pad Path

यु॒ञ्जाथा॑म् । रास॑भम् । रथे॑ । वी॒ळुऽअ॑ङ्गे । वृ॒ष॒ण्व॒सू॒ इति॑ वृषण्ऽवसू । मध्वः॑ । सोम॑स्य । पी॒तये॑ ॥ ८.८५.७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:85» Mantra:7 | Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:8» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:7


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रथ में रासभ का योजन

Word-Meaning: - [१] हे (वृषण्वसू) = जीवन के धनों का वर्षण करनेवाले प्राणापानो! आप (वीड्वंगे) = दृढ़ अंगोंवाले इस रथे रथ में (रासभम्) = ऋग्, यजु, सामरूप वाणियों का उच्चारण करनेवाले प्रभु को (युञ्जाथाम्) = युक्त करिये। प्रभु ही मेरे रथ के सञ्चालक हों। प्रभुरूप सारथि को पाकर मैं इस रथ के द्वारा लक्ष्यस्थान पर क्यों न पहुँचूँगा? उस समय, प्रभु की प्रेरणा में मेरा जीवन कितना शुद्ध होगा? विजय ही विजय को प्राप्त करता हुआ मैं अवश्य काम-क्रोध आदि शत्रुओं का विजेता 'जिष्णु' होऊँगा । [२] हे प्राणापानो! इस प्रकार वासनाओं का विनाश करके आप (मध्वः) = जीवन को मधुर बनानेवाले (सोमस्य पीतये) = सोम के रक्षण के लिये होओ। इस सोमरक्षण के द्वारा हम 'सौम्य' जीवनवाले बनें।
Connotation: - भावार्थ- हमारे शरीररथ के सञ्चालक प्रभु हों, वे हमें 'ज्ञान, कर्म व उपासना' की प्रेरणा देते हुए सोमरक्षण द्वारा सुन्दर जीवनवाला बनाएँ।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, complementary harbingers of the showers of wealth, honour and excellence, harness the roaring motive power in your strongly built, unbreakable chariot and go to the house of the celebrant to promote the honey sweets of knowledge and power for the peace and joy of the world.