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अति॑ नो विष्पि॒ता पु॒रु नौ॒भिर॒पो न प॑र्षथ । यू॒यमृ॒तस्य॑ रथ्यः ॥

English Transliteration

ati no viṣpitā puru naubhir apo na parṣatha | yūyam ṛtasya rathyaḥ ||

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Pad Path

अति॑ । नः॒ । वि॒ष्पि॒ता । पु॒रु । नौ॒भिः । अ॒पः । न । प॒र्ष॒थ॒ । यू॒यम् । ऋ॒तस्य॑ । र॒थ्य्शः॒ ॥ ८.८३.३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:83» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:3» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:3


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऋतस्य रथ्य: [देवाः]

Word-Meaning: - [१] हे देवो ! (नः) = हमें (विष्पिता) = विविधरूपों में प्राप्त (पुरः) = बहुत इन शत्रु बलों को (अति पर्षथ) = शत्रुवध के द्वारा पार प्राप्त कराओ। हम इन शत्रुओं के आक्रमणों के शिकार न हो जाएँ। अथवा विस्तृत यज्ञ आदि कर्मों के, रक्षणों द्वारा, समाप्ति तक ले चलो। इस प्रकार पार ले चलो (न) = जैसे (नौभिः अपा) = नावों द्वारा जलों के पार पहुँचाया जाता है। [२] हे देवो ! (यूयम्) = आप (ऋतस्य रथ्यः) = ऋत के जो भी ठीक है, उसके प्रणेता हो। आप हमें ठीक ही मार्ग पर ले चलेंगे।
Connotation: - भावार्थ- ' वरुण, मित्र व अर्यमा' आदि देव हमें ठीक मार्ग पर ले चलते हैं। ये हमें शत्रुबलों के पार प्राप्त कराते हैं तथा उत्तम कर्मों में पूर्णता तक पहुँचानेवाले होते हैं।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O leaders of the knowledge and efficiency of truth and karma and the science of yajna, just as you cross the seas by boat, similarly take us by karma across the vast seas of life.