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प्र स्तो॑ष॒दुप॑ गासिष॒च्छ्रव॒त्साम॑ गी॒यमा॑नम् । अ॒भि राध॑सा जुगुरत् ॥

English Transliteration

pra stoṣad upa gāsiṣac chravat sāma gīyamānam | abhi rādhasā jugurat ||

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Pad Path

प्र । स्तो॒ष॒त् । उप॑ । गा॒सि॒ष॒त् । श्रव॑त् । साम॑ । गी॒यमा॑नम् । अ॒भि । राध॑सा । जु॒गु॒र॒त् ॥ ८.८१.५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:81» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:37» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:5


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! (अवोभिः) आपकी महती रक्षा के द्वारा हम मनुष्य (विद्म+हि) इस बात को अच्छे प्रकार जानते हैं कि (त्वा) तू (तुविकूर्मिम्) सर्वकर्मा महाशक्ति (तुविदेष्णम्) सर्वदाता महादानी (तुविमघम्) सर्वधन (तुविमात्रम्) सर्वव्यापी है, ऐसा तुझे हम जानते हैं, अतः हम पर कृपा कर ॥२॥
Connotation: - ईश्वर सर्वशक्तिमान् सर्वधन सर्वदाता है, अतः वही प्रार्थ्य और स्तुत्य है ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभुस्तवन व पुरुषार्थ से धनार्जन

Word-Meaning: - [१] जीव को चाहिए कि (प्र स्तोषत्) = प्रभुस्तवन करे। (उप गासिषत्) = प्रभु का ही गायन करे । (गीयमानं साम श्रवत्) = गाये जाते हुए प्रभुस्तोत्रों को ही सुने, अर्थात् जीवन को प्रभुस्तवन व गुणगानमय बना दे। [२] यह जीव (राधसा) = कार्यसाधक धन की प्राप्ति के हेतु (अभिजुगुरत्) = उद्यमशील हो, अर्थात् पुरुषार्थ से जीवनयात्रा की सिद्धि के लिये धनार्जन करे ।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभुस्तवन करें और पुरुषार्थ से धनार्जन करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! त्वा=त्वाम्। तुविकूर्मिम्=सर्वकर्माणं महाशक्तिम्। तुविदेष्णम्=महादानम्। तुविमघम्=महाधनं सर्वधनम्। तुविमात्रम्=सर्वमात्रं सर्वव्यापकम्। अवोभिः=रक्षाभिः सह। विद्म+हि=जानीम एव ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let man adore and celebrate Indra, sing in honour of divinity, hear songs of adoration, and with all wealth, power and honour thank and praise Indra as the giver.