Viewed 336 times
तु॒रीयं॒ नाम॑ य॒ज्ञियं॑ य॒दा कर॒स्तदु॑श्मसि । आदित्पति॑र्न ओहसे ॥
English Transliteration
Mantra Audio
turīyaṁ nāma yajñiyaṁ yadā karas tad uśmasi | ād it patir na ohase ||
Pad Path
तु॒रीय॑म् । नाम॑ । य॒ज्ञिय॑म् । य॒दा । करः॑ । तत् । उ॒श्म॒सि॒ । आत् । इत् । पतिः॑ । नः॒ । ओ॒ह॒से॒ ॥ ८.८०.९
Rigveda » Mandal:8» Sukta:80» Mantra:9
| Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:36» Mantra:4
| Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:9
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे इन्द्र ! (नः) हम लोगों के (वाजयुं) विजयाभिलाषी (रथं) रथ को (अव) बचा। (ते) तुम्हारे लिये (किं+इत्) सर्व कर्म (परि) सर्व प्रकार से (सुकरं) सहज है अर्थात् तुम्हारे लिये अशक्य कुछ नहीं, इस हेतु महासंग्राम में (अस्मान्) हम लोगों को (जिग्युषः) विजेता (सुकृधि) अच्छे प्रकार कीजिये ॥६॥
Connotation: - ईश्वर हम लोगों के रथ को विजयी और हमको विजेता बनावे ॥६॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
तुरीय यज्ञिय नाम
Word-Meaning: - [१] हे प्रभो ! (यदा) = जब आप हमारे लिये (तुरीयम्) = चौथे (यज्ञियं नाम) = पवित्र नाम को करा करते हैं, (तत्) = तो (उश्मसि) = हम आपकी प्राप्ति की ही कामना करते हैं। मन में सब के हित की भावना को लेने पर हम 'वैश्वानर' होते हैं। सर्वहितकारी कर्मों में सफलता के लिये 'तैजस' अर्थात् तेजस्वी शरीरवाले बनते हैं और मस्तिष्क में ज्ञानदीप्ति को प्राप्त करके 'प्राज्ञ' बनते हैं। अब चौथे स्थान में 'शान्त शिव अद्वैत' स्थिति को प्राप्त करते हैं। यही 'यज्ञिय तुरीय नाम' हैं। [२] इस तुरीय नाम को प्राप्त करने पर (आत् इत्) = अब शीघ्र ही (पतिः) = सर्वरक्षक आप (नः) = हमें (ओहसे) = अपने समीप प्राप्त कराते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम 'वैश्वानर, तैजस व प्राज्ञ' बनते हुए 'शान्त शिव अद्वैत' स्थिति में पहुँचें । यहीं प्रभु की प्राप्ति होती है।
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे इन्द्र ! वाजयुं=विजयाभिलाषिणम्। नः=अस्माकं रथम्। अव=रक्ष। ते=तव। किमित्=किमपि सर्वं परि परितः। सुकरं=तव कर्तुमशक्यं न किञ्चिदस्ति। तस्माद् अस्मान् जिग्युषः=जेतॄन्। सुकृधि=सुष्ठु कुरु ॥६॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - The yajnic name that you have won for us is the best and highest we love and desire in preference to paternal, maternal or fraternal name, since by that name only you as our master and sustainer have got us the highest identity.
