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अवा॑ नो वाज॒युं रथं॑ सु॒करं॑ ते॒ किमित्परि॑ । अ॒स्मान्त्सु जि॒ग्युष॑स्कृधि ॥

English Transliteration

avā no vājayuṁ rathaṁ sukaraṁ te kim it pari | asmān su jigyuṣas kṛdhi ||

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Pad Path

अव॑ । नः॒ । वा॒ज॒ऽयुम् । रथ॑म् । सु॒ऽकर॑म् । ते॒ । किम् । इत् । परि॑ । अ॒स्मान् । सु । जि॒ग्युषः॑ । कृ॒धि॒ ॥ ८.८०.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:80» Mantra:6 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:36» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:6


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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अङ्ग) हे (इन्द्र) परमात्मन् ! (किम्) मैं तुझसे क्या निवेदन करूँ, तू स्वयं (रध्रचोदनः) दीनों का पालक है और (सुन्वानस्य) उपासक जनों का (अविता+इत्) सदा रक्षक ही है। क्या (नः) हम लोगों को (इन्द्र) हे इन्द्र ! (कुवित्) बहुधा (सु) अच्छे प्रकार (शकः) समर्थ बनावेगा ॥३॥
Connotation: - वह देव दीनों और उपासकों की रक्षा किया करता है, अतः क्या वह हमारी रक्षा न करेगा ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'रक्षक व विजयप्रापक' प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे प्रभो! आप (नः) = हमारे (वाजयुम्) = शक्ति को अपने साथ जोड़नेवाले (रथम्) = इस शरीररथ को (अवा) = रक्षित करिये। (ते) = आपके लिये (परि) = चारों ओर दिखनेवाला यह कर्त्तव्य समूह (किमित्) = क्या ही (सुकरम्) = सुगमता से करने योग्य है, आप हमारे इन शरीररथों का अनायास ही रक्षण कर सकते हैं। [२] हे प्रभो ! आप (अस्मान्) = हमें (सुजिग्युषः) = उत्तम विजयशील (कृधि) = करिये। आपकी शक्ति से शक्तिसम्पन्न होकर हम सदा विजयी बनें।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमारे शरीररथों का रक्षण करते हैं-प्रभु के लिये यह बात अनायास ही साध्य है। प्रभु हमें विजयी बनायें।
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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! किमङ्ग=हे सर्वशक्तिमन् ! किमहं ब्रवीमि। त्वम्। रध्रचोदनः=दीनपालकोऽसि एवं सुन्वानस्य=उपासकजनस्य। अविता+इत्=एव। हे इन्द्र ! नः=अस्मान्। कुवित्=बहु सु=सुष्ठु। शकः=शक्तान् करिष्यसि ॥३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Protect our chariot racing for victory. Every thing is easy and possible for you every way, is there anything beyond? Pray justify our ambition for victory and make it possible.