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इन्द्र॒ प्र णो॒ रथ॑मव प॒श्चाच्चि॒त्सन्त॑मद्रिवः । पु॒रस्ता॑देनं मे कृधि ॥

English Transliteration

indra pra ṇo ratham ava paścāc cit santam adrivaḥ | purastād enam me kṛdhi ||

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Pad Path

इन्द्र॑ । प्र । नः॒ । रथ॑म् । अ॒व॒ । प॒श्चात् । चि॒त् । सन्त॑म् । अ॒द्रि॒ऽवः॒ । पु॒रस्ता॑त् । ए॒न॒म् । मे॒ । कृ॒धि॒ ॥ ८.८०.४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:80» Mantra:4 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:35» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:4


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (शतक्रतो) हे अनन्तकर्म्मा सर्वशक्तिमान् परमात्मन् ! तुझसे (अन्यं) दूसरा कोई (मर्डितारम्) सुखकारी देव (नहि) नहीं है। (अकरं) यह मैं अच्छी तरह से देखता और सुनता हूँ। (बळा) यह सत्य है, इसमें कुछ भी सन्देह नहीं है। हे (इन्द्र) इन्द्र ! इस हेतु (नः) हम लोगों को (त्वं) तू (मृळय) सुखी बना ॥१॥
Connotation: - ईश्वर ही जीवमात्र का सुखकारी होने के कारण सेव्य और स्तुत्य है ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'उन्नति के साधक' प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! आप (नः रथम्) = हमारे इस शरीररथ को (प्र अव) = प्रकर्षेण रक्षित करिये। आपने ही शक्ति व प्रज्ञान को प्राप्त कराके हमें सुरक्षित करना है। [२] हे (अद्रिवः) = आदरणीय प्रभो ! आप (पश्चात् चित् सन्तम्) = पीछे भी होते हुए पिछड़े हुवे भी (एनम्) = इस (मे) = मेरे [रथं=] शरीररथ को (पुरस्तात् कृधि) = आगे करिये। आपके अनुग्रह से हम अवनत न रहकर खूब उन्नत हो जाएँ ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमारे शरीररथ का रक्षण करते हैं। ये हमें आगे बढ़ाते हैं ।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे शतक्रतो=अनन्तकर्मन् सर्वशक्तिमन् देव ! त्वत्तः। अन्यम्। मर्डितारं=नहि अकरं न पश्यामि। बळा=बट्=सत्यमेतत्। अतः। हे इन्द्र ! त्वम्+नः=अस्मान्। मृळय=सुखय ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord of thunderous action, pray protect our chariot of life even if it lag behind and let it move on ahead for the sake of our survival and advancement.