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किम॒ङ्ग र॑ध्र॒चोद॑नः सुन्वा॒नस्या॑वि॒तेद॑सि । कु॒वित्स्वि॑न्द्र ण॒: शक॑: ॥

English Transliteration

kim aṅga radhracodanaḥ sunvānasyāvited asi | kuvit sv indra ṇaḥ śakaḥ ||

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Pad Path

किम् । अ॒ङ्ग । र॒ध्र॒ऽचोद॑नः । सु॒न्वा॒नस्य॑ । अ॒वि॒ता । इत् । अ॒सि॒ । कु॒वित् । सु । इ॒न्द्र॒ । नः॒ । शकः॑ ॥ ८.८०.३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:80» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:35» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:3


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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे देव ! (यत्) जब-जब (स्वे+सधस्थे) अपने स्थान पर (देवानां+दुर्मतीः) सज्जनों के शत्रुओं को (अव+ईक्षे) देखूँ, तब-तब (राजन्) हे राजन् ! (द्विषः) उन द्वेषकारी पुरुषों को (अपसेध) दूर कर और (स्रिधः) हिंसक पुरुषों को हम लोगों के समाज से (अप+सेध) दूर फेंक दे ॥९॥
Connotation: - हम लोग जब-जब सज्जनों को निन्दित होते हुए देखें, तो उचित है कि उन निन्दकों को उचित दण्ड देवें ॥९॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'रध्रचोदन' व 'सुन्वान के रक्षक' प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो! आप (किम्) = क्या ही अंग शीघ्र अथवा खूब (रघचोदनः) = आराधक को प्रेरित करनेवाले हैं। उपासक को सदा प्रभु से उत्तम प्रेरणा प्राप्त होती है। आप (सुन्वानस्य) = यज्ञशील पुरुष के (इत्) = निश्चय से (अविता असि) = रक्षक हैं। वस्तुतः प्रभु की कृपा से ही इन यज्ञशील पुरुषों के यज्ञ पूर्ण होते हैं। [२] हे इन्द्र ! आप (नः) = हमें (कुवित्) = खूब ही (सुशक:) = उत्तम शक्तिशाली बनाइये।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु आराधकों को प्रेरणा प्राप्त कराते हैं, यज्ञशील पुरुषों का रक्षण करते हैं। ये प्रभु हमें खूब शक्तिशाली बनायें।
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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे देव ! अहम्। स्वे=स्वकीये। सधस्थे=स्थाने। देवानां=सज्जनानाम्। दुर्मतीः=शत्रून्। यत्=यदा यदा। अवेक्षेः। तदा तदा हे राजन् ! द्विषः=शत्रून्। अप+सेध=दूरी कुरु। हे मीढ्वः=सुखसेचक ! स्रिधः=हिंसकान्। अप+सेध ॥९॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lord dear as breath of life, sustainer of the weak, inspiring protector of the creative and progressive as you are, would you not strengthen us and bless us more and ever more?