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आ वां॒ विश्वा॑भिरू॒तिभि॑: प्रि॒यमे॑धा अहूषत । राज॑न्तावध्व॒राणा॒मश्वि॑ना॒ याम॑हूतिषु ॥

English Transliteration

ā vāṁ viśvābhir ūtibhiḥ priyamedhā ahūṣata | rājantāv adhvarāṇām aśvinā yāmahūtiṣu ||

Pad Path

आ । वा॒म् । विश्वा॑भिः । ऊ॒तिऽभिः॑ । प्रि॒यऽमे॑धाः । अ॒हू॒ष॒त॒ । राज॑न्तौ । अ॒ध्व॒राणा॑म् । अश्वि॑ना । याम॑ऽहूतिषु ॥ ८.८.१८

Rigveda » Mandal:8» Sukta:8» Mantra:18 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:28» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:2» Mantra:18


SHIV SHANKAR SHARMA

राजकर्त्तव्य कहते हैं।

Word-Meaning: - (अश्विनौ) हे शोभनाश्वयुक्त राजा और अमात्य (प्रियमेधाः) प्रियसमाज सामाजिक प्रजाहितकारी पुरुष जहाँ-२ (यामहूतिषु१) न्यायालय आदि स्थानों में (अध्वराणा२म्) राज्यकार्य्यों के (राजन्तौ) स्वामी (वाम्) आप दोनों को (विश्वाभिः) समस्त (ऊतिभिः) रक्षणीय व्यवहारों के लिये (आ+अहूषत) बुलावें, वहाँ-२ आप जाया करें ॥१८॥
Connotation: - राजा प्रतिदिन न्यायालय में जाकर मन्त्री आदिकों के साथ राज्यकार्य्य निरीक्षण करे ॥१८॥
Footnote: १−यामहूति−उग्रपुरुष जहाँ वश में लाए जाते हैं, उसे याम कहते हैं अर्थात् न्यायालय। उस न्यायालय के कार्य को यामहूति कहते हैं। यद्वा व्यवस्था देनेवालों को याम कहते हैं। उनका जो आह्वान, उसे यामहूति कहते हैं। २−अध्वर−अध्व=मार्ग, उसे जो दिखावे, उसे अध्वर कहते हैं ॥१८॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अध्वराणाम्, राजन्तौ) हे हिंसारहित यज्ञादि कर्मों के स्वामी (अश्विना) सेनाध्यक्ष तथा सभाध्यक्ष (विश्वाभिः, ऊतिभिः) सब प्रकार की रक्षाओं के सहित ! (वाम्) आपको (प्रियमेधाः) यज्ञप्रिय मनुष्य (यामहूतिषु) यज्ञों में (आहूषत) आह्वान करते हैं ॥१८॥
Connotation: - हे यज्ञादि कर्मों के नेता सभाध्यक्ष तथा सेनाध्यक्ष ! आप हमारे यज्ञ को प्राप्त होकर हमारी सब ओर से रक्षा करें, ताकि हमारा यज्ञ निर्विघ्न पूर्ण हो ॥१८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'यज्ञों के रक्षक' प्राणापान

Word-Meaning: - [१] हे प्राणापानो! (प्रियमेधाः) = यज्ञप्रिय लोग (विश्वाभिः ऊतिभिः) = सब रक्षणों के हेतु से (वाम्) = आपको (आ अहूषत) = सर्वथा पुकारते हैं। प्राणापान ने ही रक्षण का कार्य करना है। इनसे रक्षित होने पर ही सब यज्ञ चलते हैं। [२] हे (अश्विना) = प्राणापानो! (यामहूतिषु) = [याम:- संयमः] संयम की पुकारोंवाले यज्ञों में (अध्वराणां राजन्तौ) = सब हिंसारहित कर्मों में आप ही दीप्त होते हो । प्राणसाधना से ही हम इन्द्रियों व मन का संयम कर पाते हैं। तभी हमारे जीवन में सब अध्वरों का प्रवर्तन होता है।
Connotation: - भावार्थ- प्राणापान ही हमारे सब यज्ञों का रक्षण करते हैं। यह साधना ही हमें संयमी बनाती हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

राजकर्तव्यमाह।

Word-Meaning: - हे अश्विना=अश्विनौ ! यामहूतिषु=यम्यन्ते नियम्यन्ते वशं नीयन्ते उग्राः पुरुषा यत्र स यामो न्यायालयः=यामस्य हूतिषु कार्य्येषु। यद्वा। यमयन्ति=नियमयन्ति= व्यवस्थापयन्ति ये ते यामाः=व्यवस्थापका नियमरचयितारः। तेषां हूतिराह्वानं येषु स्थानेषु ते यामहूतयो न्यायालयाः तेषु। अध्वराणाम्=राज्यकार्य्याणाम् अध्वानो मार्गास्तान् राति ददाति दर्शयतीति अध्वरः कार्य्यम्। अध्वञ्छब्दः कर्तव्यतासूचकः=त्वया अनेन अध्वना गन्तव्यं त्वया तेन मार्गेण च गन्तव्यमित्यनेन कर्तव्यनिर्देशो भवति। तेषामध्वराणाम्। राजन्तौ=ईशौ समर्थौ। राजतिरैश्वर्य्यकर्मा। वाम्=युवाम्। विश्वाभिः=सर्वाभिः। ऊतिभिः=रक्षाभिर्हेतुभिः। यदा-२ प्रियमेधाः=प्रियसमाजाः सामाजिकाः प्रजाहितकारिणः पुरुषाः। आहूषत=आह्वयन्ति=आह्वानं कुर्युस्तदा-२ तत्र राजादिभिर्गन्तव्यम् ॥१८॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अध्वराणाम्) हे हिंसारहितयज्ञकर्मणाम् (राजन्तौ) स्वामिनौ (अश्विना) व्यापकौ (विश्वाभिः, ऊतिभि) सर्वाभिः रक्षाभिः सहितौ ! (वाम्) युवाम् (प्रियमेधाः) प्रिययज्ञा जनाः (यामहूतिषु) यज्ञेषु (आहूषत) आह्वयन्ति ॥१८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, all the ruling lights of yajnic performances and programmes of creation and production, lovers and devotees of solemn ceremonies, at all stages of their mission, invoke you with all your means and modes of protection and promotion of the holy projects.