Go To Mantra
Viewed 390 times

आ नो॑ गन्तं रिशादसे॒मं स्तोमं॑ पुरुभुजा । कृ॒तं न॑: सु॒श्रियो॑ नरे॒मा दा॑तम॒भिष्ट॑ये ॥

English Transliteration

ā no gantaṁ riśādasemaṁ stomam purubhujā | kṛtaṁ naḥ suśriyo naremā dātam abhiṣṭaye ||

Pad Path

आ । नः॒ । ग॒न्त॒म् । रि॒शा॒द॒सा॒ । इ॒मम् । स्तोम॑म् । पु॒रु॒ऽभु॒जा॒ । कृ॒तम् । नः॒ । सु॒ऽश्रियः॑ । न॒रा॒ । इ॒मा । दा॒त॒म् । अ॒भिष्ट॑ये ॥ ८.८.१७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:8» Mantra:17 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:28» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:2» Mantra:17


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः उसी अर्थ को कहते हैं।

Word-Meaning: - (रिशादसा) हे हिंसक चोरादिविध्वंसी हे दुष्टजननिग्राहक (पुरुभुजा) हे बहुतों को भोजयिता और पालयिता हे बहुधन राजा और अमात्य ! (नः) हमारे (इमम्+स्तोमम्) इस स्तोत्ररूप शास्त्रों के सुनने के लिये आप (आगन्तम्) आया करें तथा (नः) हम पाठकजनों के (सुश्रियः) सुश्रीक (कृतम्) कीजिये और उसके लिये (नरा) हे सर्वनेता हे प्रजाहितकारी ! (इमा) इन पार्थिव विविध गौ, हिरण्य, पृथिवी आदि धनों को (अभिष्टये) कल्याणप्राप्ति के लिये (दातम्) दीजिये ॥१७॥
Connotation: - राजा और अमात्य पाठशालादिकों के निरीक्षण के लिये सर्वत्र जाया करें ॥१७॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (रिशादसा) हे शत्रुओं को भगानेवाले (पुरुभुजा) बहुत रत्नों के भोक्ता (नरा) नेता ! आप (इमम्) इस (नः, स्तोमम्) हमारे स्तोत्र के (आ) अभिमुख (गन्तम्) आवें (नः) हमको (सुश्रियः) शोभनश्रीयुक्त (कृतम्) करें (अभिष्टये) यज्ञ के अर्थ (इमा) इन भौतिक पदार्थों को (दातम्) दें ॥१७॥
Connotation: - हे शत्रुओं पर विजय प्राप्त करनेवाले सभाध्यक्ष तथा सेनाध्यक्ष ! आप हमारे यज्ञ के पूर्त्यर्थ उत्तमोत्तम पदार्थ प्रदान करते हुए हमारे यज्ञ को प्राप्त होकर हमें उत्साहित करें ॥१७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रिशादसा-पुरुभुजा

Word-Meaning: - [१] हे (रिशादसा) = हमारे हिंसक काम-क्रोध आदि शत्रुओं को खा जानेवाले प्राणापानो ! (न:) = हमारे (इमम्) = इस (स्तोमम्) = स्तुति समूह को (आगन्तम्) = आप प्राप्त होवो। आप (पुरुभुता) = बहुतों के पालन व पोषण करनेवाले हो। हमारा पालन, पूरण व रोगों से रक्षण करनेवाले हो । [२] हे (नरा) = हमें उन्नति-पथ पर ले चलनेवाले प्राणापानो! आप (नः) = हमें (सुश्रियः) = उत्तम श्रीवाला (कृतम्) = करिये। (इमा) = इन सब वसुओं को (अभिष्टये) = अभि प्राप्ति के लिये, अभीष्ट सुख की प्राप्ति के लिये (दातम्) = दीजिये ।
Connotation: - भावार्थ- प्राणापान शत्रुओं का हिंसन करनेवाले हैं, हमारा पालन व पूरण करनेवाले हैं। हमें ये उत्तम श्रीवाला बनाते हैं। ये हमें सब इष्टों को प्राप्त करायें।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तमेवार्थमाह।

Word-Meaning: - हे रिशादसा=रिशादसौ रिशतां हिंसतां स्तेनादीनां निरसितारौ। यद्वा। रिशानां हिंसकानाम् अत्याचारिणाम् अत्तारौ विनाशकौ। हे पुरुभुजा=पुरुभुजौ बहूनां भोजयितारौ पालयितारौ प्रभूतधनौ च राजामात्यौ। युवाम्। नोऽस्माकम्। इमम्=प्रत्यक्षं पठ्यमानम्=स्तोमम्=स्तुतिं शास्त्रादिलक्षणम्। प्रति आगन्तमागच्छतं श्रवणाय। पुनः। हे नरा=सर्वस्य प्रजावर्गस्य नेतारौ। नोऽस्मान्। सुश्रियः=सुश्रीकान् शोभायुक्तान्। कृतम्=कुरुतम्। तथा तदर्थम्। इमा=इमानि पुरो दृश्यमानानि पार्थिवानि धनानि। अभिष्टये=अभिप्राप्तये। दातम्=दत्तम् ॥१७॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (रिशादसा) हे शत्रुनाशकौ (पुरुभुजा) बहूनां रत्नानां भोक्तारौ (नरा) नेतारौ ! (इमम्) एतम् (नः, स्तोमम्) अस्माकं स्तोत्रम् (आ) अभि (गन्तम्) आगच्छतम् (नः) अस्मान् (सुश्रियः) शोभनश्रीयुक्तान् (कृतम्) कुरुतम् (अभिष्टये) यज्ञाय च (इमा) इमानि भौतिकानि (दातम्) दत्तम् ॥१७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Leading lights of life and nature, counter powers of violence, and harbingers of universal prosperity, come, listen to our adoration, assess our yajnic achievement, bless us with the beauty and graces of life, and give us all these and competence for the desired peace, progress and self-fulfilment.